भोपाल की पुलिस लाइन में हवलदार ने लगाई फांसी

भाजपा राज में ‘सिंघम तनाव में

नीरज पांडे ॥ भोपाल
सरकार और आला अफसरों के तमाम दावे और वायदों के बावजूद मैदानी पुलिसकर्मियों का तनाव बढ़ता ही जा रहा है। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ अब भोपाल से भी पुलिसकर्मियों द्वारा खुद को खत्म कर लेने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। नेहरू नगर पुलिसलाइन में दो दिन पहले एक हवलदार ने फांसी लगा ली। हवलदार के परिजनों ने उसे लटके हुए देख लिया और तुरंत फंदे से उतार लिया। अस्पताल ले जाने पर हवलदार की जान तो बच गई लेकिन बताया जा रहा है कि उसकी गले की हड्डी टूट गई है। राजधानी में ही किरकिरी न हो इसलिए पुलिस ने इस पूरे मामले को दबा दिया। बताया जाता है कि काम के दबाव के कारण हवलदार ने खुदकुशी करने की कोशिश की जबकि पुलिस अधिकारी इसके पीछे पारिवारिक कारण बता रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधान आरक्षक मनोज पुलिस लाइन में रहते हैं। उनकी एक बेटी व दो बेटे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी की शादी की है। पिछले कुछ दिनों से वह मानसिक रूप से परेशान थे। दो दिन पहले दोपहर में हवलदार ने अपने कमरे में फांसी लगा ली। वे फंदे पर जैसे ही लटके वैसे उनके परिजनों ने उन्हें देख लिया। देखते ही उनके पैर को सहारा देकर ऊपर कर दिया गया। इस समय तक मनोज बेहोश हो चुके थे। फंदे से उतारकर उन्हें तुरंत ही एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। तुरंत इलाज मिल जाने के कारण उनकी जान बच गई। दो दिन बाद उन्हें छुट्टी भी दे दी गई है। लेकिन बताया जा रहा है कि उनकी गले की हड्डी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है जिसका लंबे समय तक इलाज चलेगा।

जांच भी नहीं हो रही
पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले को हलके में लिया है। आईजी जयदीप प्रसाद को छोड़ सभी आला अधिकारियों को इस मामले की जानकारी है इसके बाद भी हवलदार द्वारा खुदकुशी की कोशिश क्यों इस मामले कीजांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। कमला नगर पुलिस का कहना है कि अभी प्री-एमएलसी रिपोर्ट नहीं आई हैं जिसके कारण परिजनों के बयान लेने की कार्रवाई नहीं की गई है। आत्महत्या के प्रयास की धारा 309 खत्म हो जाने के कारण कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है।
काम के दबाव से पैदा हो रही पारिवारिक समस्याएं
पुलिसकर्मी टेंशन में हैं। लगातार ड्यूटी के कारण पुलिस वाले परिवार पर भी ध्यान नहीं दे पाते जिसके कारण पारीवारिक समस्याएं पैदा होती है। इसी तनाव के चलते वे खुदकुशी कर लेते हैं। पिछले साल डीजीपी आरके शुक्ला को सौंप गई रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हूई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि दो साल में 700 से ज्यादा जवानों की मौत हो चुकी है। इनमें बीमारियों व खुदकुशी के कारण हुई मौतें शामिल हैं। काम के दबाव और पारिवारिक परेशानियों के चलते 14 पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या करने की बात भी बताई गई थी। इनमें से आठ ने फांसी लगाई, तो चार ने खुद को गोली मार ली।
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। पारिवारिक मामला होगा अगर ऑफीशियल होता तो जरूर पता चलता
जयदीप प्रसाद
आईजी भोपाल
पुलिसकर्मी ने फांसी लगाई थी, उसने ऐसा क्यों किया इसकों मैं दिखवा रहा हूं।
राहुल कुमार लोधा
एसपी साउथ
पुलिसकर्मी ने पारिवारिक कारणों के चलते आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसका इलाज हो गया है। समय पर देख लेने के कारण उसकी जान बच गई।
विजय दुबे रक्षित निरीक्षक


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