सात पीढिय़ों से नारद की पूजा कर रहा परिवार

चित्रकोट में इन्द्रावती नदी किनारे मावलीमाता मंदिर परिसर में रखी एक प्रतिमा को नारद की मूर्ति मानकर एक परिवार सात पीढिय़ों से पूजा करता आ रहा है। परंपरानुसार इस प्रतिमा को रविवार को नहलाया नहीं जाता। प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि के दौरान मूर्ति को अलंकृत भी किया जाता है। जिला मुख्यालय से 41 किमी दूर चित्रकोट के खाल्हेपारा में इंद्रावती नदी के किनारे लगभग 10 वीं शताब्दी की महिषासुर मर्दिनी, गणेश, भैरवी, उमा महेश्वर, नारद, बेताल आदि की आठ से अधिक मूर्तियां हैं। पुरातत्व विभाग की सर्वे सूची में इन मूर्तियों का उल्लेख है परंतु इन्हें संरक्षित करने का प्रयास विभाग द्वारा कभी नहीं किया गया। जानकारी के अभाव में चित्रकोट आने वाले सैलानी भी इन पुरा महत्व की दुर्लभ मूर्तियों को नहीं देख पाते।
धाकड़ परिवार कर रहा सुरक्षा
वर्षों से इन मूर्तियों की सुरक्षा धाकड़ परिवार करता आ रहा है। इन मूर्तियों में एक प्रतिमा की ऊॅंचाई करीब दो फीट है तथा उसके एक हाथ में करताल व दूसरे में वीणा है। वीणा के निचले हिस्से को किसी ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसे नारद की प्रतिमा बताते हुए परिवार के सदस्य कहते हैं कि उनका परिवार सात पीढिय़ों से नारद प्रतिमा की पूजा करता आ रहा है। सभी देवताओं के संपर्क में रहने वाले नारदजी की आराधना से उनके परिवार की समस्याएं दूर होती रही हैं।
धर्म प्रचारक हो सकते हैं
प्रतिमा 10 वीं शताब्दी की है। प्रतिमा की चल आकृति को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि यह धर्म प्रचारक की मूर्ति हो सकती है। ग्रामीण इसकी आकृति व हाथ में करताल व खंडित वीणा को देखकर नारद मान कर पूजा कर रहे हैं।
> एएल पैकरा,
संग्रहाध्यक्ष, जिला पुरातत्व संग्रहालय, जगदलपुर


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