ऑक्सीजन बढ़ाने के नाम पर लगाए जा रहे डेकोरेटिव प्लांट्स

खानापूर्ति॥ कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर समान्य से बहुत ज्यादा
सच प्रतिनिधि।। भोपाल
शहर में वाहन और उद्योग की संख्या बढऩे से प्रदूषण बढ़ गया है। लेकिन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए शहर में ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं, जो सिर्फ शोपीस प्लांट हैं। जबकि ऑक्सीजन लेवल बनाए रखने के लिए नीम, बरगद, पीपल जैसे पेड़ लगाने की जरूरत है जो 50 गुना ज्यादा ऑक्सीजन छोड़ते हैं और 30 फीसदी कार्बन डॉय ऑक्साइड को सोख लेते हैं। भोपाल नगर निगम और राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) के अफसरों ने अपना टारगेट पूरा करने शहर के पर्यावरण को ही दांव पर लगा दिया है। पिछले शहर में करीब 17 से 18 प्रतिशत भाग पर ही वन हैं। अभी करीब दस लाख पौधे लगाए जाने की आवश्यकता है। यदि इतने पौधे पेड़ बन जाएं तो शहर के तापमान में कमी आने के साथ प्रदूषण काफी कम हो जाएगा।
बता दें कि सीपीए ने बीते साल करीब अस्सी हजार पौधे रोपे थे। अफसरों का दावा है कि अस्सी प्रतिशत से ज्यादा पौधे जिंदा है। इस साल बीस हजार से ज्यादा ऑक्सीजनयुक्त पौधे लगाने की योजना है। इस बार भी महज एक से दो प्रतिशत छायादार, आठ से दस प्रतिशत फलदार और 90 फीसदी शो वाले पौधे लगाए जा रहे हैं।
शहर में 12 गुना ज्यादा प्रदूषण
शहर में वाहन और उद्योगों की संख्या बढऩे से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 12 गुना तक ज्यादा है। इसमें पीएम-10, पीएम-2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बनमोनो ऑक्साइड, अमोनिया और लेड जैसे घातक तत्व शामिल हैं। होशंगाबाद रोड, कटारा हिल्स, अयोध्या बाइपास पर पेड़ लगातार कट रहे हैं।
50 पौधे भी एक व्यक्तिकी जरूरत नहीं कर पाते पूरी
दिखावटी 50 पौधे भी एक व्यक्ति को ऑक्सीजन देने या काबर्न डाई ऑक्साइड सोखने का काम नहीं कर सकते। विशेषज्ञों के अनुसार नीम, पीपल, बरगद और बेल-पत्र जैसे पेड़ों की उम्र पचास से डेढ़ सौ साल तक होती है। दिखावटी, फलदार और छायादार पौधे तीन से चार साल में बड़े हो जाते हैं। इनके रखरखाव पर एक समान खर्च होता है। सीपीए एक पौधे की तीन साल तीन माह तक देखभाल करने पर करीब पंद्रह सौ रुपए खर्च करता है। विभाग का पौधरोपण के लिए करीब छह से सात करोड़ का बजट है। वहीं निगम हर साल एक करोड़ से ज्यादा खर्च कर रहा है। यदि छायादार पौधे लगाए जाए तो भी अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। दो नीम के पेड एक व्यक्ति को ऑक्सीजन व ढाई आदमी द्वारा छोड़ी गई काबर्न डाई ऑक्साइड सोखने की क्षमता रखते हैं। वहीं हानिकारक गैसों को भी सोखते हैं।
पहली बात तो पेड़ सिर्फ कागजों में दिखाई दे रहे हैं,धरातल पर नहीं। छायादार और फलदार पौधों की आयु दिखावटी पेड़ों से कई गुना ज्यादा होती है। ये पौधे तीन से चार वर्ष की उम्र में ही ऑक्सीजन देने लगते हैं। सीपीए और नगर निगम को अगले 50 सालों के पर्यावरण को ध्यान में रखकर पेड़ लगाने चाहिए।
> सभाषसी पांडे, पर्यावरणविद्
ऑक्सीजन युक्त पेड़ नहीं लगने से ऑक्सीजन लेवल शहर में कम और वायु में प्रदूषण ज्यादा हो गया है। तीन महीने पहले के डाटा बताते हैं कि शहर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में 12 गुना का इजाफा हुआ है।
> डॉ. प्रेम श्रीवास्तव, वैज्ञानिक, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
ऐसा नहीं है शहर में ऑक्सीजन वाले पेड़ भी लगाए जा रहे हैं।शहर के कुछ इलाकों में ही सौंदर्यीकरण वाले पौधे लगाए गए हैं।
> सुदीप सिंह, सीसीएफ, सीपीए


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