सगे भाई हैं सूर्य के सारथी अरुण और विष्णु के वाहन गरुड़

भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ सूर्यदेव के रथ के सारथि अरुण हैं, दोनों ही सगे भाई हैं। ये गिद्ध की प्रजाति के पक्षी माने गए हैं। इनके पिता कश्यप ऋषि हैं। रामायण में जो जटायु सीता को बचाने के लिए रावण से लड़ा और उसके हाथों मारा गया वो अरुण का ही पुत्र है। जटायु के एक और भाई संपाति का भी रामायण में जिक्र मिलता है। संपाति ने ही सीता की खोज में समुद्र किनारे तक पहुंचे वानरों को लंका का रास्ता बताया था। महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थीं। इनमें से एक का नाम विनता था। विनता ने महर्षि कश्यप की बहुत सेवा की। प्रसन्न होकर महर्षि ने विनता से वरदान मांगने को कहा। विनता ने कहा कि मुझे दो महापराक्रमी पुत्र चाहिए। महर्षि कश्यप ने विनता को ये वरदान दे दिया। समय आने पर विनता ने 2 अंडे दिए। इन्हें दासियों ने गरम बर्तनों में रख दिया। पांच सौ वर्ष होने पर भी जब उन अंडों से विनता के पुत्र बाहर नहीं निकले तो उन्हें चिंता होने लगी। जिज्ञासावश विनता ने एक अंडा फोड़ दिया। उस अंडे के शिशु का शरीर आधा ही बन पाया था। उस शिशु ने अपनी माता से कहा कि- दूसरे अंडे के साथ ऐसा न करना। इससे उत्पन्न शिशु महापराक्रमी होगा। समय आने पर दूसरे अंडे से पक्षीराज गरुड़ का जन्म हुआ।


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