हजरत शाह विलायत की दरगाह जहां निवास कतरे हैं बिच्छु

अमरोहा की हजरत शाह विलायत की दरगाह में हर कोने में बिच्छु छुपे हैं किसी दीवार, किसी पेड़ या किसी भी कोने की मिट्टी जरा सी हटाते ही सैंकड़ों की तादाद में बिच्छु निकल आते हैं। लेकिन मजे की बात ये है कि ना तो ये किसी को काटते हैं ना परेशान करते हैं। आप इन्हें हाथ में भी उठा सकते हैं। यहां तक कि अपने साथ घर भी ले जा सकते हैं। लेकिन एक निश्चित अवधि के भीतर इन्हें वापस दरगाह लाना जरूरी होता है वरना ये अपने असली रंग में आ सकते हैं और काफी खतरनाक हो सकते हैं।
800 साल पुरानी कहानी
इस दरगाह में बिच्छू कैसे आये और पालतू बने इसकी कहानी करीब 800 साल पुरानी बतायी जाती है। कहते हैं कि उस दौर में ईरान से सैयद सरबुद्दीन शाह विलायत भारत में अमरोहा आये और वहीं अपना मुकाम बनाने का फैसला किया। जिस पर वहां पहले से मौजूद बाबा शाह नसरुद्दीन आपत्ति की, वे नहीं चाहते थे कि हजरत शाह विलायत वहां मुकाम करें। इसी क्रम में पहले उन्होंने एक कटारे में पानी हजरत शाह विलायत के पास भेजा जिसका जवाब उन्होंने कटोर में पानी के ऊपर फूल रख कर दिया। एक दूसरे को पीछे हटने के लिए मजबूर करने का ये सिलसिला ही बिच्छुओं के आने का जरिया बना।


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