स्कूल यूनिफार्म विशेष दुकानों पर हो रही खुली लूट

वाणिज्य प्रतिनिधि ॥ भोपाल
पिछले कई वर्षों से शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में यूनिफार्म दुकानदार मनमाने पर बेचते आ रहे हैं। स्थानीय प्रशासन प्रतिवर्ष इस जकड़ी हुई व्यवस्था को तोडऩा चाहते हैं किंतु तोड़ नहीं पाते हैं। मौजूदा समय में यूनिफार्म निर्माता 200-400 मीटर कपड़ा किसी विशेष डिजाइन का खरीदकर स्कूल से पास करवा लेते हैं। उसके बाद 200-250 रुपए वाली यूनिफार्म 600 से 800 रुपए तक में बेच रहे है। इतना बड़ा मुनाफा किन-किन में वितरित होता है यह जगजाहिर है। अभिभावकों का कहना है गरीब, मध्यम परिवारों को इस ठगी से बचाने के लिए सभी स्कूलों के लिए एक सामान्य कलर की घोषणा सरकार को करनी चाहिए। अभिभावक राजमणि कहते है कि यदि सरकार ऐसी व्यवस्था स्कूलों के लिए अनिवार्य कर दे तो सभी मिलों और व्यापारियों का कारोबार अच्छा चलेगा और यूनिफार्म भी सस्ते में मिल सकेंगे। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार का ध्यान इस योजना की ओर नहीं है। जिसका फायदा यूनिफार्म विक्रेता भरपूर उठा रहे हैं। क्योंकि प्रायवेट सहित सरकारी स्कूलों का यूनिफार्म विशेष दुकानों से बिकने का मतलब है खुली ठगी।
स्कूल यूनिफार्म का कारोबार पूरे जोश में
अधिकमास होने से कपड़ा बाजार में ग्राहकी एकदम ठंडी रही। आगामी दिनों में सावन मास की लहरिया, चुन्नी आदि में ग्राहकी निकलनी शुरू हो जाएगी। वर्तमान में स्कूल यूनिफार्म का कारोबार पूरे जोश के साथ चल रहा है। अगले एक-डेढ़ माह तक चलने की आशा है। स्कूल, यूनिफार्म में राज्य शासन सभी स्कूलों के लिए एक समान कलर तय कर दें , तो पालकों को काफी राहत मिल सकती है। वर्तमान में पालकों से 200- 250 रुपए के यूनिफार्म के 400 से 600 रुपए वसूले जा रहे हैं। कलर समान करने का सर्वाधिक लाभ गरीब, मध्यम वर्ग के परिवारों को होगा। वित्त मंत्रालय राज्यों के रुके हुए रिफंड राशि का 60 प्रतिशत देने को राजी हो गया है।


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