अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले शिवसेना ने दिखाए तेवर, मोदी सरकार को लग सकता है तगड़ा झटका

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में मोदी सरकार को समर्थन नहीं दिए जाने की तरफ इशारा किया गया है.

फाइल फोटो.

नई दिल्ली: अविश्वास प्रस्ताव से चंद घंटे पहले शिवसेन ने मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया है. दरअसल, शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीयमें मोदी सरकार को समर्थन नहीं दिए जाने की तरफ इशारा किया गया है. सामना ने लिखा है, ”आज संसद में सरकार पर हल्ला बोल होगा. आरोपों का गोलमोल जवाब देकर मेजें थपथपाई जाएंगी. यह जनभावनाओं की कद्र करने वाली नहीं बल्कि तानाशाही चलाने वाली सरकार है. तानाशाह का समर्थन करने की बजाय हम जनता के साथ जाएंगे.”

संपादकीय के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सामना ने कहा है- मौजूदा सरकार ने जो बहुमत प्राप्त किया है वह संदेहास्पद है. पार्टी ने अकूत धन, तानाशाही और मतदान मशीनों में हेराफेरी कर जीत हासिल की है. आज मोदी हमेशा की तरह भाषण देंगे, चारों तरफ तालियों की गड़गड़ाहट होगी. हो सकता है विपक्ष के पास बहुमत न हो और सरकार बच जाए. लेकिन, विपक्ष के इस अविश्वास प्रस्ताव ने कहीं न कहीं सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

उधर, उद्धव ठाकरे के निकट सहयोगी हर्षल प्रधान ने बताया कि उद्धव ने सभी सांसदों से शुक्रवार को दिल्ली में मौजूद रहने के लिए कहा है. पार्टी के निर्णय के बारे में सुबह शिवसेना अध्यक्ष उन्हें बताएंगे. शिवसेना द्वारा जारी किए गए व्हिप में पार्टी सांसदों से कहा गया था कि उन्हें दिन भर संसद में मौजूद रहना होगा. हालांकि किसी एक पक्ष में वोट करने को लेकर व्हिप जारी नहीं किया गया था. पार्टी अध्‍यक्ष उद्धव ठाकरे ही अंतिम निर्णय लेंगे.

हालांकि, अब तक माना यह जा रहा था कि शिवसेना भाजपा के साथ जाएगी. गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बात भी की थी. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पार्टियों के बीच सबकुछ ठीक है और शिवसेना भाजपा के समर्थन में वोट करेगी. लेकिन पार्टी ने सामना के जरिए काफी हद तक अपना रुख साफ कर दिया है.

क्या कहता है सांसदों का गणित
आपको बता दें कि 543 सांसदों वाली लोकसभा में इस वक्त 532 सांसद हैं. लोकसभा में फिलहाल 11 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से देखा जाए तो बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 267 सीटों का है. फिलहाल भाजपा के 272 सांसदों के साथ सरकार के पक्ष में कुल 295 सांसद हैं. अगर शिवसेना भाजपा का साथ दे तो यह आंकड़ा 313 हो जाएगा. लेकिन फिलहाल पार्टी ने अपनी रुख साफ नहीं किया है. उधर विरोध में 147 सांसद हैं. शिवसेना के 18 सांसदों को मिला दिया जाए तो यह संख्या 165 हो जाएगी. अब तक 90 सांसद अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या नहीं यह  फिलहाल साफ नहीं हो पाया है.


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