उड़ीसा में लापता हुए मध्य प्रदेश के टाइगर!

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
उड़ीसा के सतकोसिया टाईगर रिजर्व भेजे गए मप्र के दो बाघों के लापता होने और इन बाघों को शिफ्ट किए जाने से आदिवासियों की नाराजगी की खबरों के बीच मप्र सरकार ने बाघों की शिफ्टिंग पर रोक लगा दी है। कुल चार बाघ मप्र से सतकोसिया शिफ्ट करने का फैसला हुआ था लेकिन जून में शिफ्ट किए गए दो बाघों की करीब 15 दिनों से लोकेशन नहीं मिलने के कारण फिलहाल मप्र सरकार ने शेष बाघों की शिफ्टिंग को रोक दिया है।
कान्हा और बांधवगढ़ नेशनल पार्क से यह दो बाघ भेजे गए थे। सूत्रों के अनुसार कान्हा टाईगर रिजर्व से जिस तीसरे बाघ को सतकोसिया शिफ्ट करने के लिए चुना गया था, अब उसे संजय डुबरी नेशनल पार्क भेजे जाने का फैसला वन विभाग ने लिया है। सतकोसिया भेजे गए दो बाघों को लेकर स्थिति साफ होने और इसके बाद बनने वाली स्थिति को देखते हुए सतकोसिया में अगला बाघ भेजने पर विचार करने का निर्णय वन विभाग ने लिया है।
इधर सतकोसिया के जंगलों के आसपास रहने वाले आदिवासियों के विरोध ने भी उड़ीसा सरकार के साथ-साथ मप्र सरकार को चिंता में डाल दिया है। इन आदिवासी सतकोसिया में बाघ को शिफ्ट करने का विरोध कर रहे हैं। इस विरोध के कारण इन दोनों बाघों के शिकार की आशंका बढ़ गई है। उड़ीसा में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर मप्र के वन अफसर पूरी निगाह रखे हुए हैं और उड़ीसा के वन विभाग के अफसरों से भी लगातार संपर्क में हैं।
आदिवासियों का आरोप, नरभक्षी बाघों को किया शिफ्ट
सतकोसिया के जंगलों से अपनी आजीविका चलाने वाले आदिवासी समुदाय के लोगों के उड़ीसा के जिस अंगुल जिले के अंतर्गत सतकोसिया टाईगर रिजर्व आता है, वहां कलेक्टर से मिलकर आदिवासियों ने बाघों की शिफ्टिंग का विरोध किया है। इन आदिवासियों का कहना है कि मप्र से नरभक्षी बाघों को भेजा गया है, जिससे आदिवासियों की जीवन पर संकट है। इन आदिवासियों का यह भी कहना है कि बाघों को जंगल में छोडऩे से पहले उन्हें नहीं बताया गया। इन सभी स्थितियों और लगातार सामने आ रही खबरों के बाद फिलहाल तीसरे बाघ की शिफ्टिंग को रोकने का फैसला मप्र के वन विभाग ने किया है।
इधर मप्र में भी हो रहा बाघों को शिफ्ट करने का विरोध
उड़ीसा के साथ-साथ मप्र में बाघों की शिफ्टिंग का विरोध हो रहा है। आईटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे इस मामले में सरकार के फैसले के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हैं। दुबे ने बताया कि उड़ीसा से उन्हें मिली जानकारी के अनुसार मप्र के कान्हा और बांधवगढ़ से भेजे गए बाघों पर संकट के बादल गहरा गए हैं। कान्हा के बाघ महावीर को सतकोसिया टाईगर रिजर्व में रेडियो कॉलर पहना कर पहले छोड़ा गया लेकिन वहां हाथी न होने से इसकी मॉनीटरिंग नहीं हो पा रही है। उड़ीसा के मयूरभंज जिले के सिमलिपाल टाईगर रिजर्व से हाथी को स्थानीय जनता के विरोध के कारण सतकोसिया टाईगर रिजर्व नहीं भेज गया। पिछले 15 दिनों से बाघ को सतकोसिया में नहीं देखा गया। लोगों के आक्रोश के कारण हालत गंभीर हैं। दुबे ने कहा कि वे एनटीसीए से संपर्क इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करेंगे।


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