जहांगीर के सहयोग से हुआ अकबरी चर्च का निर्माण

शहर के तकरीबन 10 चर्चों का ऐतिहासिक महत्व है। इनमें से वजीरपुरा स्थित अकबरी चर्च का खास इतिहास है। इसमें शहर का पहल क्रिसमस मनाया गया था। ईसाई समाज की एक पुस्तक के अनुसार, 1562 से शहर में ईसाईयों का आगमन शुरू हुआ।
सम्राट अकबर द्वारा धन और जमीन देने पर सन 1600 में जुसुइट फादर ने इसे बनवाया। जहांगीर की ईसाई धर्म में आस्था बढऩे लगी। तब उन्होंने कहा, यह लाहौर चर्च की अपेक्षा छोटा व सुंदर भी कम है। भव्य रूप देने के लिए जहांगीर ने धन दिया। लेकिन सन् 1615 में मुगल और पुर्तगालियों के बीच मतभेद हो गए। जहांगीर ने चर्च को तुड़वा दिया। इसके बाद फिर निर्माण हुआ, लेकिन 1616 में चर्च में आग लग गई। 1632 में शाहजहां ने पुर्तगालियों के स्थान हुगली पर चढ़ाई कर दी। चर्च के फादर जेसुईट को भी पकड़ा। 1634 में शाहजहां ने फादर जेसुईट व अन्य को चर्च तुड़वाने की शर्त पर छोड़ा। सन् 1636 में शाहजहां ने चर्च बनवाया। 1748 को पार्सियन आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली ने मुगल सल्तनत को तहसनहस कर दिया। इस चर्च को भी निशाना बनाया। बाद में चर्च की मरम्मत के बाद इसे माता मरियम के नाम पर समर्पित कर दिया। सेंट मेरीज चर्च के प्रधान पुरोहित ने बताया यह चर्च 1851 तक आगरा का प्रमुख चर्च रहा है। चर्च की मध्य भाग की दीवार लाल पत्थरों की है, जिस पर नक्काशी की हुई है। यह मुगल कालीन स्थापत्य कला से मेल खाती है।


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