हॉकर्स नीति फेल, पुरानी जगह पर लौटी ठेलों की भीड़

सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
भेल उपनगर के चार प्रमुख बाजार पिपलानी मार्केट, बजरंग मार्केट, गांधी मार्केट और गोविंदपुरा मार्केट में भेल नगरीय प्रशासन ने हॉकर्स कॉर्नर की नीति अपनाई थी, जो कुछ माह बाद ही फेल हो गई है। चार माह बाद ज्यादातर ठेले संचालक फिर से पुरानी जगहों पर लौट आए हैं। फुटकर ठेला संचालकों का कहना है कि प्रशासन ने पैसे तो ले लिए मगर सुविधाएं नहीं दी गई। हॉर्कस कॉर्नर में ग्राहक नहीं आते थे, ऐसे स्थिति में पुरानी जगहों पर ही आना पड़ा। भेल क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में चाय, सब्जी, फल, चाट,चाऊमीन और समोसे के करीबन 400 से अधिक ठेले लगते हैं। प्रशासन ने चार प्रमुख बाजारों में हॉकर्स कॉनर्र की नीति अपनाई। ताकि सभी ठेले व्यवस्थित एक जगह खड़े हो सकें। इसके लिए प्रशासन ने प्रति ठेले से 5 से 7 हजार रूपए सलाना वसूल रहा है। इसके एवज में भेल नगरीय प्रशासन ने हॉर्कस कार्नर में ठेला खड़े करने के लिए जगह दी। ठेला संचालकों का आरोप है कि हॉर्कस नीति के तहत जिन जगहों पर दुकान लगाते थे, वहां बिजली, पानी और सड़क कुछ भी नहीं है, जिस वजह से ग्राहक दुकानों पर नहीं आते और भूखे मरने की नौबत आ गई थी, इसलिए हमें पुरानी जगहों पर ही ठेला लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जल्द होगी कार्रवाई
भेल नगरीय प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि फुटकर ठेले वालों के लिए हॉकर्स कॉर्नर बनाए गए हैं। भेल नगरीय प्रशासन का बेदखली दल जल्द ही कार्रवाई करेंगा और ठेला संचालकों पर फाईन लगाया जाएगा। ठेला संचालकों ने खुद पैसे जमा कराए थे। इसके बाद दुकान में ग्राहक नहीं आने का बहाना करना गलत है। प्रशासन इनके खिलाफ सख्ता कार्रवाई करेगा। ठेका संचालक हॉर्कस कॉनर में ही लगाने पड़ेंगे।


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