MP: शिक्षा का मंदिर बना शराबियों को अड्डा, टीचर्स लाठी-डंडा लेकर बैठने को मजबूर

मध्य प्रदेश के श्योपुर में ‘स्कूल चले हम’ अभियान को कुछ शराबी ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं.

(फोटो साभार: स्क्रीन ग्रैब)

आलोक भारद्वाज, भोपाल: मध्य प्रदेश के श्योपुर में ‘स्कूल चले हम’ अभियान को कुछ शराबी ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं. शहर के बीचों बीच बनें प्राथमिक केन्द्र में 102 छात्र-छात्राएं पढ़ने तो आते है लेकिन कक्षा में डरे सहमे बैठे रहते हैं. छात्र-छात्राओं को डर शिक्षकों का नहीं बल्कि उन शराबियों का रहता है जो स्कूल परिसर में शराब पीकर कभी बच्चों से तो कभी शिक्षिकाओं से छेड़छाड़ करते हैं. स्कूल शिक्षिकाएं अब मजबूरन अपनी सुरक्षा की वजह से कक्षाओं के बाहर लाठी-डंडे लेकर बैठने को मजबूर हैं. मामला सलापुरा प्राथमिक शाला केन्द्र जो कि कराहल तहसील के आदिम जाति कल्याण विभाग का है. यहां चार शिक्षिकाएं पदस्थ हैं लेकिन एक शिक्षिका 2 दिन की छुट्टी लेकर गई जो 5 महीने बीतने के बाद भी वापस नहीं आई तो दूसरी शिक्षिका और स्कूल प्रभारी कविता जैन भी स्कूल में फैली अव्यवस्था के चलते अपना अटेचमेंट कराकर बालक आश्रम की प्रभारी बन गईं. अब स्कूल में दो ही शिक्षिकाएं हैं जो 102 बच्चों को पढ़ा रही हैं. स्कूल के अंदर लग रही चाय की दुकान स्कूल की शिक्षिका अंजू भदौरिया का कहना है कि कराहल तहसील का प्राथमिक केन्द्र सलापुरा में सबसे ज्यादा पानी की समस्या है. दो साल से हैण्डपम्प खराब है, जिसकी वजह से बच्चे रोड पार करके पानी लाते हैं. वहीं शराबी यहां स्कूल के अन्दर आकर लेट जाते है और परेशान करने के अलावा यहां गाली गलौच भी करते हैं. शिक्षिका ने आगे बताया कि महिला होने के नाते हम डंडे रख लेते हैं ताकि कभी जरूरत पड़े तो अपनी सुरक्षा कर सकें. वहीं दूसरी शिक्षिका सीमा चौरसिया का कहना है कि स्कूल पर शराबियों ने कब्जा कर रखा है. 2 दिन के अवकाश पर गई प्रभारी आज पांच महीने होने के बाद भी वापस नहीं आई हैं.

कलेक्टर ने किया जांच का वादा 
प्रधान अध्यापक के कमरे में ताला लगा रखा है लेकिन पता नहीं किसने लगाया है. स्कूल में बाउन्ड्री वाल न होने की वजह से शराबियों ने यहां अड्डा बना लिया है. स्कूल परिसर के अन्दर ही लोगों ने चाय की दुकान लगा ली है.  जिले के कलेक्टर, इनका कहना है कि हम जांच कराएंगे.  डीपीसी को भी बताया जायेगा कि ऐसी स्थिति है तो सर्वप्रथम स्कूल को शराबियों से मुक्त कराया जाएगा. इसके बाद शिक्षकों की कमी भी देखेगें और पेयजल की व्यवस्था भी की जायेगी.


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