ऐसी ही फिल्मों से बने हैं मेरे फैंस : सोनाक्षी

अपने करियर की शुरुआत में दबंग, राउडी राठौर, सन ऑफ सरदार जैसी कमर्शियल, हीरो सेंट्रिक फिल्में करने वाली ऐक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा 100 करोड़ी क्लब की फेवरिट हीरोइन थीं। फिर उन्होंने अकीरा, नूर, इत्तेफाक जैसी लीक से हटकर फिल्में कीं। हिरोइन सेंट्रिक फिल्मों को लेकर सोनाक्षी का मानना है कि दर्शकों को च्वॉइस देना जरूरी है तभी वह जान पाएंगे कि ये फिल्में भी अच्छी होती हैं। अब फैमिली एंटरटेनर फिल्म हैपी फिर भाग जाएगी लेकर आ रहीं सोनाक्षी ने फिल्म और करियर के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की:
कमर्शियल फिल्मों से फैंस और फ्रीडम दोनों मिला
सोनाक्षी कहती हैं, अपने करियर की शुरुआत में जो फिल्में मैंने कीं, उनसे मुझे बहुत कुछ मिला। एक तो, मैंने जो सीखा, सेट पर ही सीखा क्योंकि मैंने कोई ऐक्टिंग क्लासेज नहीं ली थी। दूसरे, आज मेरी जो लॉयल ऑडियंस है, वह उन्हीं फिल्मों की वजह से है, जो मैंने अपने करियर के शुरुआत में की थीं। तब लोग थोड़ा-बहुत मजाक उड़ाते थे कि ऐसी फिल्में क्यों कर रही है। रोल कम है, हीरो सेंट्रिक है, लेकिन ऑडियंस बनती कहां से है। इन्हीं फिल्मों से बनती है।
लोग ज्यादा फिल्में कौन सी देखते हैं?
यही फिल्में देखते हैं। अब भी जो फैंस मेरी फिल्में देखने जाते हैं, वे इन्हीं फिल्मों से बने हैं। इसीलिए, मुझे लगता है कि मैंने बेस्ट चीज की कि वैसी फिल्मों से शुरुआत की। इन फिल्मों की कामयाबी ने ही मुझे वह आजादी दी, आत्मविश्वास दिया और मेरी एक जगह बना दी कि हां, अब मैं एक फिल्म को अपने कंधे पर उठा सकती हूं। इन फिल्मों ने ही मेरी यह साख बनाई कि मैं टाइटल रोल वाली फिल्में कर पाऊं।
आगे भी दोनों तरह की फिल्में करूंगी
फिल्में न चलने पर लोगों के नजरिये में क्या बदलाव आया? इस सवाल पर सोनाक्षी ने कहा, काम के लिहाज से टचवुड कोई फर्क नहीं पड़ा। अब भी जो लोग मेरे साथ काम करना चाहते हैं, वे इसलिए नहीं करना चाहते हैं कि मेरी फिल्में चलती हैं या नहीं चलती है। वे मेरे साथ इसलिए काम करना चाहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मैं एक ऐक्टर के तौर पर उस फिल्म को अपनी परफॉर्मेंस से और बेहतर बना सकती हूं। रही बात ऑडियंस के नजरिए की, तो वह हर फ्राइडे बदलता है। ठीक है, पिछले फ्राइडे नहीं चली फिल्म, अगले फ्राइडे चल जाएगी, तब उनका नजरिया बदल जाएगा। वैसे, सिक्के के दोनों पहलू देखने के बाद उनकी फिल्म चॉइसेस कैसे बदलेंगी? इस पर वह कहती हैं, मैं अब भी दोनों तरह की फिल्में करूंगी। मेरे पास चॉइस है कि मुझे क्या करना है, तो मुझे जिस भी फिल्म में रोल, कहानी और सेट-अप अच्छा लगेगा, मैं वह कर लूंगी।
मुझे कॉमिडी करना पसंद है
फिल्म हैपी फिर भाग जाएगी से जुडऩे के बारे में वह बताती हैं, जब मैंने स्क्रिप्ट सुनी, तो वह मुझे बहुत फनी, बहुत एंटरटेनिंग लगी, तो मैंने हां कर दिया। मैं यह किरदार इसलिए भी करना चाहती थी क्योंकि हैपी मुझसे बहुत मिलती-जुलती है। मुझमें भी पंजाबियत भरी हुई है। मुझे खाना भी पंजाबी पसंद है। डांस भी पंजाबियों की तरह करती हूं, तो अगर किरदार आपसे मिलता-जुलता हो, तो वह करने में और मजा आता है। फिर, मुझे कॉमिडी फिल्में करना बहुत पसंद है। मैं फैमिली एंटरटेनर करना चाहती हूं, जो मैं इतने साल से करती आ रही हूं, तो मेरे लिए यह बहुत अच्छा अनुभव रहा।
ऑडियंस की सोच बदली है
सोनाक्षी ने कहा था कि दर्शक हीरो सेंट्रिक फिल्में देखने आसानी से थिअटर चले जाते हैं, जबकि हिरोइन सेंट्रिक फिल्में देखने कम जाते हैं, इस सोच में अब कोई बदलाव देखती हैं? यह पूछने पर उन्होंने कहा, हां, पिछले 2 सालों में यह सोच बदली है, क्योंकि अब ऐसी बहुत सारी फिल्में बनने लगी हैं। जैसे, अगर एक बच्चे को आप लॉलिपॉप नहीं देंगे, तो उसे पता नहीं होगा कि लॉलिपॉप होता क्या है! वह केक ही खाता रहेगा। जब आप उसे दोनों का चॉइस देंगे, तब उसे लगेगा कि अच्छा यह चीज भी अच्छी है। यही बात ऑडियंस के साथ भी है। आप उन्हें फीमेल सेंट्रिक फिल्में देंगे, तब वे उसे ऐक्सेप्ट करेंगे। यह हमारे लिए अच्छा है।


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