चुनावी मुकदमों में उलझे पीएचक्यू और प्रोसिक्यूशन

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
वर्ष 2013 के विधानसभा और 2014 में हुए लोकसभा के चुनाव के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय और अभियोजन संचालनालय उलझ गए हैं। दर्ज मामलों के आंकड़ों को लेकर दोनों भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पुलिस मुख्यालय अपने रिकार्ड के हिसाब से बता रहा है कि पिछले दोनों चुनावों के दौरान 286 चुनाव से जुड़े मामले दर्ज हुए थे, जबकि अभियोजन संचालनालय के रिकार्ड में केवल 104 मामलों की जानकारी ही उसे है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ढाई महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे चुनाव आयोग ने हाल ही में गृह विभाग के साथ बैठक कर पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज मामलों की जानकारी मांगी थी। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्हीएल कांताराव ने इन मामलों में लंबित नोटिस को तामील कराने के चुनाव आयोग के निर्देशों से गृृह और पुलिस विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया था। चुनाव आयोग के निर्देश के बाद चुनाव संबंधी मामलों की छानबीन से सामने आया हैकि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के 28 6 मामले लंबित हैं। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय ने दी है। इन मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए जब अभियोजन संचालनालय को इन्हें भेजा गया था, तो उसके रिकार्ड में इनमें से अधिकांश मामले नहीं होने की बात सामने आई। उल्लेखनीय है कि चुनाव संबंधी मामलों में राज्य सरकार के अभियोजन अधिकारी राज्य सरकार की ओर से अदालत में पैरवी करते हैं। दर्ज मामलों को लेकर हो रही गफलत को दूर करने के लिए अभियोजन संचालनालय ने अपने सभी जिला अभियोजन अधिकारियों को पीएचक्यू से प्राप्त मामलों की लिस्ट भेज इस संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। पीएचक्यू ने दर्ज मामलों की जो लिस्ट सौंपी है, वह जिलेवार है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान किस जिले में कितने मामले पुलिस ने दर्ज किए गए, इनका ब्यौरा दिया गया है। इस ब्यौरे के आधार पर अभियोजन अधिकारियों को अपनी सूची से मिलान करने को कहा गया है।
80 हजार वारंट पेंडिंग
प्रदेश में करीब 80 हजार ऐसे गैर जमानती वांरट हैं जो अब तक तामील नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग यही चाहता है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले प्रदेश का पुलिस विभाग इन वारंटों को तामील कराकर अपराधियों को धरपकड़ करे ताकि चुनाव के दौरान यह किसी तरह की गड़बड़ी न कर सकें। इन पेंडिंग वारंटों के कारण भी अभियोजन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही।


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