सीएम कहते रहे, एलयूएन को बंद करो, अफसरों ने नहीं सुनी

डॉ. अनिल सिरवैया ॥ भोपाल
जिस लघु उद्योग निगम पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लंबे समय वक्रदृष्टि है, उसी निगम ने एक बार फिर सरकार को मुख्यमंत्री और उनकी सरकार को मुश्किल में डाल दिया है, बल्कि चौथी बार सरकार बनाने की कवायद को कमजोर कर दिया है।
दो दिन से मध्यप्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कैंसर वाली जिन ‘चप्पल-जूतोंÓ का जिक्र हो रहा है, उसकी खरीदी का पूरा काम इसी निगम ने किया था। सामग्रियों की खरीदी में भ्रष्टाचार का गढ़ माने जाने इस निगम को बंद करने की बात खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कई बार कह चुके हैं, लेकिन अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देश को मानने को तैयार नहीं हैं। चरण पादुका योजना में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए खरीदे गए जूतों-चप्पलों में कैंसर वाले रसायन की बात सामने आने के बाद एक बार फिर निगम पर उंगली उठने लगी हैं। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव बीपी सिंह और अपने सचिवालय के अधिकारियों के सामने फिर नाराजगी जताई है। मुख्यमंत्री की इस नाराजगी के बाद ही कल वन मंत्री गौरीशंकर शैजवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई देने पड़ी। 22 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री चौहान ने आला अफसरों से भरी मीटिंग में लघु उद्योग निगम को बंद करने की बात कही थी। उन्होंने इस निगम को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए कहा था कि कईसालों से मेरी इस पर वक्रदृष्टि है। इसे बंद करना है। निगम के तत्कालीन एमडी व्हीएल कांताराव कोईसफाई देते, इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने उनकी तारीफ कर उन्हें चुप करा दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनके पास इस संस्था को लेकर जबरदस्त फीडबैक है। इसके बावजूद अफसरों ने इस निगम को बंद करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, बल्कि अभी भी कई विभागों के निगम सामग्रियों की खरीदी कर रहा है। वन विभाग ने जूते-चप्पलों की खरीदी का काम भी निगम को सौंपा था।
सरकार की सफाई, जूतों में कोई खतरनाक रसायन नहीं
इस मामले के सामने आने के बाद वन मंत्री गौरीशंकर शैजवार ने कल सफाई दी कि जूते-चप्पलों की खरीदी मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के माध्यम से ही की गई है। इनके वितरण के पहले गुणवत्ता का परीक्षण अनिवार्य रूप से देश की दो प्रतिष्ठित संस्थाओं फुटवेयर डिजाईन एण्ड डेवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट नोएडा और केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चैन्नई से कराया जाता है। एक संस्था से प्री-डिलीवरी परीक्षण कराया जाता है। डॉ. शेजवार ने बताया कि परीक्षण के लिये जो सेम्पल भेजे गये थे उसमें 2 लाख जूतों का लॉट इनर-सोल में रसायन की मात्रा अधिक पाये जाने पर रिजेक्ट किया जा चुका है। कम्पनी को अभी-तक किसी तरह का भुगतान नहीं किया गया है। कम्पनी को इनर-सोल बदलने के आदेश दिये जा चुके हैं। इनर सोल बदलने के बाद जूतों का पुन: परीक्षण भारत सरकार की संस्थाओं की लेबोरेटरी में करवाने के बाद ही जूतों का वितरण किया जायेगा। हितग्राहियों को इन जूतों का वितरण सोल बदलने के बाद ही किया जाएगा। महिला संग्राहकों के चप्पलों में कोई अमानक स्तर नहीं पाया गया है। उनकी चप्पलें पूर्ण गुणवत्ता वाली हैं। पुरुषसंग्राहकों को अमानक स्तर के जूते का वितरण नहीं किया गया है। परीक्षण के उपरान्त ही वितरण होता है।

24 घंटे में नमूनों की जांच केलिए चेन्नई भेजा अफसर
तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते-चप्पल और पानी की बॉटल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा पर जल्दी अमल करने के फेर में भी यह गफलत हुई है। इसके लिए कई नियमों और मापदंडों को ताक भी पर रखा गया। पहली बार बुलाई गईनिविदा में अधिक रेट आने के कारण इसे निरस्त कर किया था। लघु वनोपज संघ और लघु उद्योग निगम के अफसरों ने इसके 15 दिन के भीतर री टेंडर किया था। टेंडर की प्रक्रिया के दौरान ही एक अधिकारी को विशेष तौर पर इसलिए चेन्नई भेजा गया ताकि 24 घंटे के भीतर नमूनों की गुणवत्ता की जांच पूरी हो सके।
गोपाल बोले थे, भ्रष्टाचार का गढ़ है एलयूएन
शिवराज सरकार के मंत्री भी लघु उद्योग निगम की कार्यप्रणाली पर कईबार सवाल दाग चुके हैं। 24 दिसंबर 2014 को कैबिनेट में भंडार क्रय नियमों में क्रय के लिए वित्तीय सीमाओं को बढ़ाने का प्रस्ताव आते ही कुछ मंत्रियों ने कहा कि लघु उद्योग निगम के माध्यम से होने वाली खरीदी पर रोक लगाई जाए। इसके माध्यम से खरीदे जाने वाले सामान की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है, वहीं बाजार से महंगा सामान भी मिलता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा था कि लघु उद्योग निगम भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है।
साडिय़ां भी निगम ने खरीदीं
चरण पादुका और पानी की बोटल के साथ आदिवासी महिलाओं को साड़ी बांटने की तैयारी भी सरकार की है। साड़ी खरीदी का काम भी लघु उद्योग निगम को ही सौंपा गया है। इस साल जनवरी से निगम साड़ी खरीदी के लिए टेंडर करने में जुटा है, इसका टेंडर भी एक बार निरस्त किया जा चुका है। इसके लिए भी दूसरी बार टेंडर निकाला गया। करीब 10 लाख आदिवासी महिलाओं को साड़ी बांटने का सरकार का लक्ष्य है। निगम ने एक साड़ी की कीमत 400 रूपए तय की है। साड़ी के लिए लघु उद्योग निगम से टेंडर जारी होने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बताते हुए कहा था िकि जो साडिय़ां 40-40 रूपए में मिलतीं हैं, सरकार उन्हें 400 में खरीद रही है। महिला संग्राहकों को 11 लाख 9 हजार साड़ी बांटी जा चुकी हैं।
पुनर्गठन का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
साल 2014 में सरकार ने लघु उद्योग के पुनर्गठन का फैसला भी लिया था। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति भी हुई थी। प्राइस वाटर हाउस कूपर्स इंडिया नाम की कंपनी को कंसलटेंसी का काम सौंपा गया था। तब भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निगम के कामकाज को लेकर आपत्ति जताई थी। तब निगम को घटिया गुणवत्ता वाली दवा फर्नीचर और अन्य सामानों की खरीदारी में अपनी भूमिका के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
सीएजी ने भी उठाई थी निगम के कामकाज पर उंगली
31 मार्च 2013 को समाप्त हुए वर्ष के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के बारे में भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में भी कहा गया था, निगम को सरकारी विभागों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से आरक्षित सामानों की खरीद सुनिश्चित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। निगम के पास सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली को कार्यान्वित करने के लिए अलग से आईटी प्रकोष्ठï भी नहीं है। निगम की अलग इंटरनल ऑडिट विंग नहीं है और आंतरिक लेखा कार्य सीए फर्मों के जरिये किया जाता है।
ठ्ठ रिपोर्ट में कहा गया है, निगम ने राज्य में एसएसआई इकाइयों के विकास के लिए वित्तीय योजना समेत कोई प्रोत्साहन योजना तैयार नहीं की है। कंपनी ने मेलों और रिवर्स बायर सेलर मीटï्ïस के प्रभाव का भी आकलन नहीं किया है।
ठ्ठ मध्य प्रदेश में लघु उद्योग निगम की स्थापना विपणन, वित्तीय, तकनीकी और प्रबंधन सहायता मुहैया करा छोटे आकार के उद्योगों को प्रोत्साहित किए जाने के लिए राज्य सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई के तौर पर वर्ष 196 1 में की गई थी।


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