प्रसादी के रूप में भक्तों को दिए जाते हैं सोने के गहने

एमपी के रतलाम का प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर बेशकीमती जेवरों और लाखों के नोटों से सजाया जाता है। यहां पर धन की देवी के लिए 500 रुपए तक के नोटों से खास वंदनवार बनाया जाता है, मां के दरबार में सजाए गए चांदी के पांच हाथी लोगों के आकर्षण बने हुए है। इन जमा हुए आभूषणों से दिवाली से पहले तीन दिनों तक महालक्ष्मी का श्रृंगार किया जाता है। खास बात ये है कि दिवाली के दिन ये सभी आभूषण और नगद भक्तों को वापस लौटा दिए जाते हैं। चढ़ाई गई नगद राशि से मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर को 10 से 500 रुपए तक के नोटों के विशेष वंदनवारों से सजाया जाता है, दरअसल, रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में सालों से गहने और राशि चढ़ाने की परंपरा रही है, इस भेंट को बकायदा रजिस्टर में नाम के साथ नोट भी किया जाता है, जिसके बाद रिकॉर्ड के ही आधार पर भक्तों को सबकुछ प्रसादी के रूप में लौटा दिया जाता है।


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