युवाओं के सहयोग से ही हिंदी बनेगी विश्व भाषा: श्रीवास्तव

सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा और विश्वभाषा बनवाने में सहयोग करने के लिए युवाओं को सामने आना होगा। क्योंकि लोगों ने हिन्दी भाषा को स्वीकार तो कर लिया है। लेकिन मुझे लगता है उन्होंने अभी हिन्दी को भाषा को समद्ध भाषा बनाने में कोई न कोई कसर छोड़ रखी है और इस कसर को पूरा करने के लिए युवाओं का आगे आना होगा। यह बात संस्कृति सचिव मनोज श्रीवास्तव ने कहीं। वे रवींद्र भवन में संस्कृति संचालनालय की ओर से तीन दिवसीय साहित्योत्सव कार्यक्रम के शुभांरभ के दौरान बोल रहे। कार्यक्रम के दौरान मौजूद संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा ने कहा कि संस्कृति संचालनालय हर साल करीब 1800 कार्यक्रम आयोजित करता है और यह पहला मौका जब साहित्योत्सव का आयोजन किया गया। अब से हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा और चाइना से आए जियांग जू ने किया। समारोह की रूपरेखा और मंतव्य पर वक्त व्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने दी। दूसरा सत्र शाम पांच बजे से होगा, जिसके मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे। विशिष्ट उपस्थिति शासन के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह की होगी। इस अवसर पर ‘गुरु भक्त सिंह भक्तÓ समग्र का लोकार्पण होगा और शासन द्वारा स्थापित हिन्दी के क्षेत्र के विशिष्ट सम्मानों का अलंकरण होगा। पहले दिन समानान्तर सत्रों में सांस्कृतिक स्मृति और सृजन स्वातंपय और आतंकवाद और हिन्दी साहित्य विषयों पर चर्चा की। इस चर्चा में विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुति किए। वहीं शाम को छायावादी रचनाकारों के गीतों की संगीतमय प्रस्तुति और व्यामेश शुक्ल के निर्देशन में रूपवाणी वाराणसी की ओर से निराला की रचना ‘राम की शक्ति पूजाÓ का मंचन होगा।
कल से शुरू होगी सांस्कृति प्रस्तुतियां
15 सितंबर को सुबह 10.30 बजे संत साहित्य, 12.15 बजे प्रगतिवादी यथार्थ, दोपहर 3 बजे साहित्यक परम्परा और अन्तर्पाठ्यत्व होगा। 4.30 बजे साहित्य में कैशोर्य विमर्श पर चर्चाएं होंगी। समानान्तर विषयों में छायावाद का उत्तराधिकार, मध्यप्रदेश का हिन्दी सिनेमा को योगदान और मध्यप्रदेश में हिन्दी की सजज़्नात्मकता पर बातचीत होगी। इसी शाम 6 बजे से वृन्दगान संगीत की प्रस्तुति के साथ ही रूपवाणी वाराणसी की ओर से जयशंकर प्रसाद की कालजयी रचना ‘कामायनीÓ का मंचन किया जायेगा। 16 सितंबर को सुबह 10.30 बजे से मप्र में हिन्दी की सर्जनात्मकता को ललित निबन्ध, निबन्ध, व्यंग्य, कविता और बोलियों की सजज़्नात्मक के बहाने अभिव्यक्त करने का उपक्रम और विचार विमर्श होंगे। दोपहर 12.30 बजे से भारतीय भाषाओं और लेखक प्रकाशक के अन्त:सम्बन्धों पर चर्चा होगी। समापन सत्र शाम पांच बजे से होगा। सभी सत्रों में प्रवेश नि:शुल्क है।


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