शर्माजी शर्म करो-श्मशान में राजनीति बंद करो

विश्राम घाट में महापौर ने लगाए होर्डिंग्स
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
दुश्मन हो या दोस्त, अपना हो या पराया, जिसके जाने का सबको दुख होता है और हर एक व्यक्ति जिसको समय मिलता है, वह किसी व्यक्ति के दुखद निधन पर विश्राम घाट अंतिम दर्शन करने के साथ श्रद्धांजलि देने जरूर जाता है। ऐसे स्थान को माक्षधाम भी कहते है, लेकिन नेतागिरी ने विश्रामघाट को भी नहीं बख्सा। महापौर आलोक शर्मा ने विश्राम घाट में अपने होर्डिंग्स लगाकर यह प्रचार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी कि इस विश्राम घाट में नगर निगम द्वारा इतने करोड़ रुपए से विकास कार्य कराए जा रहे है। यह होर्डिंग्स विश्राम घाट कमेटी से पूछे बगैर लगाए गए है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि नगर निगम काम कर रहा है, इसलिए उन्होंने होर्डिंग्स लगाए है।
नगर निगम द्वारा भदभदा विश्राम घाट में विश्राम घाट के उन्नयन पर 7 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। स्थानीय विधायक व राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भी भदभदा विश्रामघाट परिसर में हनुमान जी की 65 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कराया है और माह के प्रत्येक पहले मंगलवार को सुन्दर कांड का आयोजन किया जाता है। विश्राम घाट में किए जा रहे निर्माण कार्य और उन्नयन की जानकारी वाला होर्डिंग्स विश्राम घाट पर लगाया गया है। उस होर्डिंग्स पर विश्राम घाट कमेटी को सौजन्य बताया गया है। भदभदा विश्राम घाट पर महापौर आलोक शर्मा के ऐेसे चार होर्डिंग्स लगाए गए है। दो होर्डिंग्स में स्थानीय विधायक उमाशंकर गुप्ता का भी फोटो लगाया गया है। इसी तरह सुभाष नगर विश्राम घाट में भी 7 करोड़ रुपए से विश्राम घाट के उन्नयन का होर्डिंग्स विश्राम घाट के गेट और लकड़ी के टाल के पास लगाया गया है, जिसमें महापौर आलोक शर्मा की फोटो लगी हुई है। विश्राम घाट के उन्नयन किया जा रहा है, यह तो अच्छा काम है, लेकिन लोगों का कहना है कि इस उन्नयन कार्य का श्रेय लेना और इसके लिए अपने फोटो वाला होर्डिंग्स विश्राम घाट में लगाना गलत है।
लोगों का ऐसा मानना है कि कम से कम विश्राम घाट में ऐसे प्रचार-प्रसार वाले बोर्ड नहीं लगने चाहिए। नेताओं ने पूरे शहर को होर्डिंग्स-फ्लैक्स से पाट दिया है, लेकिन अब इनकी जद में विश्राम घाट भी आ गए है। लोगों का कहना है कि विश्राम घाट को कम से कम प्रचार-प्रसार और खुद का प्रचार करने वाले होर्डिंग्स लगाने से बचना चाहिए।
6 महीने बाद चालू हुआ विद्युत शवदाह गृह
सुभाष नगर विश्राम घाट का विद्युत शवदाह गृह 14 जनवरी 2018 से बंद था। विश्राम घाट कमेटी के बार बार आग्रह करने के बाद नगर निगम ने इसकी क्वाइल बदली और अब यह चालू हो पाया है। विद्युत शवदाह गृह चालू होने के बाद कल इसमें एक शव का दाह संस्कार भी हुआ। नगर निगम की लापरवाही के कारण 9 महीने तक विद्युत शवदाह गृह बंद रहा। नगर निगम की लापरवाही इतनी है कि इसमें 12 क्वाइल लगती है और एक भी खराब हो जाए तो इसे ठीक नगर निगम नहीं करता है। भोपाल के गणमान्य नागरिकों के सहयोग से इस विद्युत शवदाह गृह का रख-रखाव हो पा रहा है। ऐेसे में महापौर द्वारा इसके उन्नयन करने का होर्डिंग्स लगाना कितना जायज है।
नगर निगम विकास के कार्य कर रहा है तो होर्डिंग्स लग गए। उसमें आपत्ति नहीं होना चाहिए। भदभदा विश्राम घाट में गुटबाजी है, इसलिए आरोप-प्रत्यारोप लग रहे है। मुझे उसमें कुछ गलत नहीं लगता।
> आलोक शर्मा, महापौर .
महापौर छोटी व ओछी मानसिकता से राजनीति कर रहे हैं। जिस जगह मनुष्य की अंतिम यात्रा पहुंचती है, वहां सिर्फ धार्मिक उपदेश और देवी-देवताओं के चित्र होने चाहिए। महापौर ने विश्रामघाटों में अपने होर्डिंग्स लगाकर दर्शा दिया है कि भोपाल में भले ही हाहाकार मचा रहे, लेकिन विकास की बात वे श्मशाम में भी करेंगे। हम उनके इस कृत्य का विरोध करते हैं और मुख्यमंत्री अपील करते हैं कि वे हस्तक्षेप कर तत्काल विश्रामघाट से झूठी लोकप्रियता के होर्डिंग हटवाने के निर्देश दें।
> कैलाश मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, नगर निगम परिषद
भदभदा विश्राम घाट समिति ने विश्राम घाट में किसी भी प्रकार की राजनीति और भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित करने का हमेशा से विरोध किया है। मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भूमिपूजन किया था, तब समिति ने विरोध किया था और भूमिपूजन कार्यक्रम में समिति का कोई सदस्य नहीं गया था। अभी भी महापौर ने अपने होर्डिंग्स लगा दिए है, जो गलत है। नगर निगम काम कर रहा है, लेकिन समिति से पूछा नहीं गया है। यह पैसा भी सरकारी है, लेकिन होर्डिंग्स खुद का प्रचार करने के लिए लगा दिए, जो गलत है। कम से कम विश्राम घाट स्थल को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
> संतोष कंसाना, कार्यकारिणी सदस्य, भदभदा विश्राम घाट समिति
नगर निगम काम कर रहा है, इसलिए नगर निगम वालो ने होर्डिंग्स लगाए है। हमने मना नहीं किया, लेकिन हमसे पूछा भी नहीं कि ऐसे बोर्ड लगाए या नहीं।
> शोभराज, सचिव, श्री विश्राम घाट समिति ट्रस्ट, सुभाष नगर
सस्ती लोकप्रियता और झूठे प्रचार के लिए महापौर आलोक शर्मा लगातार भोपाल की जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने अब अपनी राजनीति का अड्डा श्मशान को बनाना शुरू कर दिया है। भोपाल के सभी प्रमुख विश्रामघाटों में एक जैसे होर्डिंग्स लगा दिए गए हैं। सभी में स्वयं को कर्मठ और विकास पुरुष दर्शाते हुए सात करोड़ रुपए के कार्य कराने का दावा महापौर कर रहे हैं। उनका दावा झूठा है। विश्रामघाट में कई कार्य समिति द्वारा और दानदाताओं द्वारा किए गए हैं। श्मशाम में होर्डिंग्स लगाना शर्मनाक कार्य है। तत्काल श्मशान से सभी राजनैतिक नेताओं के होर्डिंग्स व पोस्टर हटना चाहिए।
– रमेश साहवानी, उपाध्यक्ष भदभदा विश्रामघाट


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