रुक्मणी के गर्म दूध से श्री कृष्ण के शरीर पर पड़े छाले

एक बार सूर्य ग्रहण के समय राधा नंद बाबा और माता यशोदा के साथ कुरुक्षेत्र में आई थी और तब श्री कृष्ण का विवाह रुक्मणी के साथ हो चुका था। यहीं पर देवी रुक्मणी ने राधा रानी को पहली बार देखा था। राधा की सुंदरता को देखकर रुक्मणी भी हैरान रह गई थी। उनकी खूबसूरती से जलन करते हुए रुक्मणी ने राधा को गर्म दूध पीने के लिए दिया। राधा जी ने भी बिना कुछ कहे ही वह गर्म दूध पी लिया। उसके बाद जब रुक्मणी वापिस कृष्ण के पास पहुंची तो उन्होंने देखा कि उनके शरीर पर छाले पड़ गए हैं। ये देख उन्होंने कृष्ण से इसका कारण पूछा तो वे बोले कि राधा ने जो गरम दूध पिया है ये उसके कारण ही हुआ है क्योंकि राधा तो मेरे हृदय में बसती हैं। राधा को कष्ट होने पर दुख मुझे ही होता है। यह सुनकर रुक्मणी को बहुत दुख हुआ और उन्होंने रोते हुए कृष्ण से अपनी भूल के लिए माफी मांगी।


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