बोर्ड ने मानी बोनस बढ़ाने की मांग, खाते में पहुंचेगा पैसा

एकजुटता ॥ रेलवे बोर्ड के साथ चर्चा के लिए यूनियन तैयार कर रही रणनीति
सिग्नल, कम्युनिकेशन विभाग को चाहिए रिस्क एंड हार्ड ड्यूटी एलाउंस
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
रेलवे के सिग्नल और कम्युनिकेशन विभाग के कर्मचारियों को रिस्क एंड हार्ड ड्यूटी का एलाउंस चाहिए। इस मांग पर रेलवे बोर्ड के साथ चर्चा करने की तैयारी कर रहे है। यूनियन के पदाधिकारी विभिन्न रेल मंडलों में जाकर सिग्नल और कम्युनिकेशन विभाग के कर्मचारी और अफसरों के साथ मुलाकात कर उन्हें शामिल कर रहे है। जिसके आगामी दिनों में होने वाली रेलवे बोर्ड के साथ बैठक में एकजुटता दिखाई जा सके। वहीं दशहरे पर मिलने वाले बोनस पर भी रेलवे बोर्ड ने बोनस की राशि बढ़ाने का फैसला किया इसके साथ ही बोनस का पैसा सीधे बैंक अकाउंट में पहुंचेगा। रेलवे संकेत एवं दूरसंचार अनुरक्षक संघ (आईआरएसटीएमयू) के पदाधिकारियों ने बीते दिनों भोपाल में बैठक की थी। संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। बैठक के दौरान नवीन कुमार ने बताया की मूलभूत से संकेत एवं दूरसंचार विभाग की सबसे बड़ी समस्या ड्यूटी रोस्टर के मुताबिक काम नहीं होना है। यार्ड स्टिक 2010 में बनी, परन्तु उसे आज तक लागू नहीं किए जाने की वजह से संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को नींद में काम करने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जिससे रेलवे तथा रेल यात्रियों की संरक्षा तथा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बैठक में चर्चा के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि संकेत एवं दूरसंचार विभाग के जो कर्मचारी पूरे दिन मेहनत कर संकेत एवं दूरसंचार उपकरणों का अनुरक्षण तथा फेलियर अटेंड करते हैं, उन्हीं कर्मचारियों को रात में भी फेलियर अटेंड करने के लिए बुलाया जाता है, जिससे वह निंद्रा अवस्था में कार्य करते हैं और इस वजह से कर्मचारी से कोई भारी गलती होने की संभावना लगातार बनी रहती है। अत: संकेत एवं दूरसंचार विभाग के महत्व को समझते हुए तुरंत प्रभाव से नाइट ड्यूटी गैंग की व्यवस्था प्रत्येक स्टेशन पर की जानी चाहिए। इसके साथ बोर्ड की आगामी बैठक की रूपरेखा तैयार की है। वहीं उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष संकेत एवं दूरसंचार विभाग में दो दर्जन से भी अधिक कर्मचारी दुर्घटना के शिकार होकर अपनी जान गवां देते हैं। इसके बावजूद संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को रिस्क एंड हार्ड ड्यूटी एलाउंस से वंचित किया जा रहा है। जबकि संकेत एवं दूरसंचार विभाग के उपकरण ज्यादातर घने जंगलों में, ऊंची पहाडय़िों पर, नदी के किनारे, रेलवे ब्रिज के किनारे स्थापित होते हैं और उस सिग्नल तक पहुंचकर संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को उसका अनुरक्षण तथा फेलियर अटेंड करना पड़ता है। इस दौरान संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रेलवे ट्रैक के ऊपर चलकर जाना होता है। यहां तक की रेलवे ट्रैक के ऊपर संकेत एवं दूरसंचार विभाग के उपकरण भी लगे होते हैं। जिससे गाड़ी की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है कि गाड़ी वास्तव में कहां है। इस कार्य में कई बार संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारी रनओवर होकर अपनी जान गवां देते हैं। बावजूद इसके संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को कोई रिस्क अलाउंस नहीं दिया जाता है। संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए भी बताया गया है। संकेत एवं दूरसंचार विभाग के हेल्परों की स्थिति में सुधार लाने के लिए एलडीसी परीक्षा हर साल ली जाए। इन तमाम मांगों पर आईआरएसटीएमयू के पदाधिकारियों की रेलवे बोर्ड के साथ बैठक होने वाली है।
17950 रुपए बोनस मिलेगा
रेलवे ने उन्हें दशहरा के पूर्व 78 दिन का बोनस देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से रेल कर्मचारियों को 17 हजार 950 रुपए मिलेंगे। रेलवे हर साल उत्पादकता आधारित बोनस अपने ग्रुप सी व ग्रुप डी कर्मचारियों को प्रदान करता है। ऑल इंडिया रेलवेमैन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) के असिस्टेंट जनरल सेकेट्री व पश्चिम मध्य रेलवे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने पहले 75 दिन का बोनस देने का निर्णय लिया था। जिसे एआईआरएफ ने ठुकराते हुए 78 दिन के बोनस की मांग की थी। बाद में एआईआरएफ की मांग को मानते हुए रेलवे बोर्ड ने 78 दिन का बोनस देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही बोनस के लिए अलग से सप्लीमेंट्री (पूरक) बिल पास करके एक ही दिन में सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में बोनस के रुपए डाल दिए जाएंगे।


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