चम्बा में स्थित है विश्व का एकमात्र यमराज का मंदिर

हिमाचल के चम्बा गांव में स्थित है यमराज का मंदिर मन्यता है कि यह मंदिर पूरे विश्व में यमराज देवता का एकमात्र पूजनीय स्थल है यहाँ नरक चतुर्दशी (जिसे रुप चौदस कहा जाता है) के दिन पूजा अर्चना करने से घर-परिवार के सभी सदस्यों की अकालमृत्यु का योग और डर टल जाता है। इस मंदिर की एक और खासियत यह है कि यह मंदिर पूरी तरह से घर की ही तरह बना हुआ है। इस मंदिर में एक तरफ खाली कमरा है जिसे यमराज देव के सचिव चित्रगुप्त का कमरा कहा जाता है। चित्रगुप्त ही सभी व्यक्ति, जीव और प्रत्येक जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं और उन्हें उसी के कर्मों के हिसाब के पुर्नजन्म देते है। इतना ही नहीं, इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार भी है जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे से निर्माण किये गए है। हर जीवात्मा को उसके कर्मों और किये गए पुण्यों के अनुसार ही इन दरवाजों से ऊपर जाने की अनुमति दी जाती है। त्रयोदशी की रात अनेकों घरों में परम्परा के मुताबिक यमराज के लिए दीपदान भी किया जाता है। इस दिन चार बातियों वाले ही दीपक को जलाने का विधान है। दीपक में सरसों का ही तेल काम में लाया जाता है। ध्यान रखें कि चारों बातियां एक ही सूत्र में बंधी हुई हो और उनका मुख दक्षिण दिशा की ही तरफ होना चाहिए।


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