मध्यप्रदेश में रेत माफिया हुआ लामबंद

जगदीश विश्वकर्मा ॥ छतरपुर
जिले में रेत का कारोबार प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है। जिसके चलते पूरे जिले में रेत माफियों का एक ग्रुप सक्रिय हो गया है और लामबंद होकर यह ग्रुप सरपंचों को मोहरा बनाकर कलेक्टर रमेश भंडारी के खिलाफ जबलपुर में एक पिटीशन दायर की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार छतरपुर जिले के कलेक्टर ने आचार संहिता के एक दिन पूर्व 13 सरपंचों की रेत खदानों को स्वीकृत किया था। परंतु 11 खदानें चालू नहीं हो पाई थीं और कलेक्टर ने इन्हें चालू न करने के लिए दबाव बनाने वाले लोगों को साफ मना कर दिया। भोपाल के एवं दिल्ली के बड़े बड़े दबाव कलेक्टर के पास आए कलेक्टर ने सभी लोगों को आश्वासन की पुडिय़ा पकड़ा दी और कहा कि इसके लिए कुछ समय हमें दें। परंतु इसी बीच कलेक्टर ने दिनांक 03.10.2018 को खनिज विभाग के पत्र क्रमांक 5327 प्रमुख सचिव मप्र खनिज विभाग बल्लभ भवन को लिखा। जिसमें उल्लेख किया गया है कि माननीय एनजीटी नई दिल्ली के आदेश दिनांक 13.09.2018 के संदर्भ में मार्गदर्शन मांगा गया है। इस पत्र को इस पत्र का जो हवाला कलेक्टर ने दिया है उसके बाद जिला स्तरीय परिवहन समिति की बैठक 18.09.2018 को आयोजित की गई थी। जिसमें समिति के द्वारा 11 रेत खदानों के प्रकरणों को पर्यावरण सहमति दिए जाने का निर्णय लिया था और उसके बाद लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन 11 खदानों को कलेक्टर द्वारा परमीशन दी जाना थी। कलेक्टर ने इसके लिए प्रमुख सचिव खनिज विभाग के मार्गदर्शन मांगा है कि इन 11 खदानों को अनुमति प्रदान की जाए अथवा नहीं।
यह पत्र भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों के गले की फांस बन गया है और अधिकारी मजेदार चटकारे ले रहे हैं। इधर सरपंचों से अनुबंध कराने वाले रेत माफियों ने आज बांदा जिले में एक बैठक का आयोजन किया और सर्वसम्मिति से कलेक्टर के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया। हालांकि कलेक्टर के द्वारा जो अपने वरिष्ठ अधिकारियेां से मार्गदर्शन लिया गया है वह केवल मात्र कागजों की खानापूर्ति के लिए लिया गया है। एक रेत माफिया ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कलेक्टर रमेश भंडारी डिजियाना कंपनी के इशारे पर काम कर रहे हैं। जिसके चलते वह सरपंचों को खनिज विभाग की नीति के अनुसार खदानों का संचालन करने का आदेश जारी किया गया था उस पर रुकावट पैदा कर रहे हैं। फिलहाल मामला उलझ चुका है जिला कलेक्टर नियम का हवाला देकर या एनजीटी के आदेश का हवाला देकर नई खदान कोई स्वीकृत नहीं करना चाहते। वहीं रेत के कारोबार में घुसे अपनी ऊंची पकड़ रखने वाले रेत माफियों ने अब कलेक्टर के खिलाफ खुलकर बिगुल फूंक दिया है और वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। एक रेत माफियों ने इसकी शिकायत भारत निर्वाचन आयोग एवं केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत आने वाली एनजीटी के वरिष्ठ अधिकारियेां से की है। एक या दो दिन में इन रेत खदानों के बारे में कोई बड़ा निर्णय सामने आने वाला है। फिलहाल छतरपुर जिले में रेत माफियों की सक्रियता और कलेक्टर की हठधर्मिता के चलते लगातार पत्राचार का दौर चल रहा है। अब मामला जबलपुर हाईकोर्ट में पहुंचने वाला है।


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