अब तक नहीं निपटे पिछले चुनाव में दर्ज हुए मुकदमे

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा से पहले नेताओं के अपराधिक रिकार्ड खंगाल रहीं राजनीतिक पार्टियां और ऐसे मामलों को लेकर चुनाव आयोग की सख्ती तथा नए नियमों के बीच तथ्य यह हैकि मप्र में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज हुए मामलों का अब तक निपटारा नहीं हा पाया है।पिछले चुनाव के समय नेताओं पर दर्ज हुए आपराधिक और आचार संहिता उल्लंघन के मामले अब भी लंबित हैं। ऐसे मामलों की सुनवाईके लिए फास्ट टै्रक कोर्टकी स्थापना होने के बाद भी प्रदेश में अब तक ऐसे लंबित मुकदमों की संख्या 100 से अधिक है।
मजेदार बात यह हैकि नेताओं पर दर्ज चुनावी मामलों को की वर्तमान में कितनी संख्या है, इसका राज्य सरकार के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है। मुकदमें दर्ज करने वाली पुलिस के आंकड़े अलग हैं तो इन मामलों को अदालत में ले जाकर सुलझाने की जिम्मेदारी निभाने वाले लोक अभियोजन संचालनालय के आंकड़े अलग हैं, इसलिए वर्ष 2013 के विधानसभा और 2014 में हुए लोकसभा के चुनाव के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय और अभियोजन संचालनालय आपस में उलझ गए हैं। दर्ज मामलों के आंकड़ों को लेकर दोनों भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पुलिस मुख्यालय अपने रिकार्डके हिसाब से बता रहा है कि पिछले दोनों चुनावों के दौरान 28 6 चुनाव से जुड़े मामले दर्ज हुए थे, जबकि अभियोजन संचालनालय के रिकार्ड में केवल 104 मामलों की जानकारी ही उसे है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे चुनाव आयोग ने अगस्त में गृह विभाग के साथ बैठक कर पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज मामलों की जानकारी मांगी थी। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्हीएल कांताराव ने इन मामलों में लंबित नोटिस को तामील कराने के चुनाव आयोग के निर्देशों से गृृह और पुलिस विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया था। चुनाव आयोग के निर्देश के बाद चुनाव संबंधी मामलों की छानबीन से सामने आया हैकि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के 28 6 मामले लंबित हैं। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय ने दी है। इन मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए जब अभियोजन संचालनालय को इन्हें भेजा गया था, तो उसके रिकार्ड में इनमें से अधिकांश मामले नहीं होने की बात सामने आई। उल्लेखनीय हैकि चुनाव संबंधी मामलों में राज्य सरकार के अभियोजन अधिकारी राज्य सरकार की ओर से अदालत में पैरवी करते हैं।
दर्ज मामलों को लेकर हो रही गफलत को दूर करने के लिए अभियोजन संचालनालय ने अपने सभी जिला अभियोजन अधिकारियों को पीएचक्यू से प्राप्त मामलों की लिस्ट भेज इस संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। पीएचक्यू ने दर्ज मामलों की जो लिस्ट सौंपी है, वह जिलेवार है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान किस जिले में कितने मामले पुलिस ने दर्ज किए गए, इनका ब्यौरा दिया गया है। इस ब्यौरे के आधार पर अभियोजन अधिकारियों को अपनी सूची से मिलान करने को कहा गया है।
मप्र में भाजपा के 28 और कांग्रेस के 12 विधायकों पर आपराधिक मामले
मध्यप्रदेश में आपराधिक मामले दर्ज होने के मामले में बीजेपी के 28 और 12 कांग्रेस के विधायक शामिल हैं। इनमें मंत्री जयभान सिंह पवैया का नाम भी शामिल है। वहीं, कांग्रेस के केपी सिंह और विधायक रंजना बघेल पर भी आपराधिक मामला दर्ज है। एडीआर ने अपरी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। मप्र इलेक्शन वॉच ने विधानसभा के मौजूदा विधायकों के आपराधिक रिकॉर्ड की एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें यह तथ्य सामने आया है। 2008 में ऐसे विधायकों की संख्या 26 है। एडीआर ने 2013 में दाखिल किए गए 225 विधायकों के हलफनामों को पड़ताल की। इसमें एक विधायक बसपा और दो निर्दलीय विधायक के खिलाफ भी गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। बीजेपी के मंत्री पवैया और कांग्रेस के केपी सिंह पर डकैती की धारा 395 के तहत मामला दर्ज है। वहीं, मनावर विधायक रंजना बघेल चुनाव में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज है।

इस बार विज्ञापन देकर बताने होंगे मामले
चुनाव में किस्मत आजमाने वाले नेताओं को इस बार विज्ञापन देकर बताना होगा कि उनके खिलाफ कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव ने इस संबंध में विस्तृत निर्देश भी जारी कर दिए हैं। नामांकन भरने के बाद हर राजनीतिक दल को अपने प्रत्याशी के चुनाव क्षेत्र में तीन बार मीडिया में विज्ञापन देना होगा। यह विज्ञापन प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या दोनों में देना होगा। विज्ञापन में बताना होगा कि उस प्रत्याशी के खिलाफ कितने आपराधिक मामले लंबित हैं। इसके अलावा हर राजनीतिक दल अपने वेबसाइट पर ये पोस्ट करेंगे कि उनके कौन-कौन से प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उन पर आरोप क्या है।
8 मंत्रियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं
आपराधिक मामले मप्र सरकार के 8 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने 2013 में अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया है। इन मंत्रियों में विश्वास सारंग, जालम सिंह पटेल, लाल सिंह आर्य, संजय सत्येंद्र पाठक, राजेंद्र शुक्ला, जयभान सिंह पवैया, हर्ष सिंह शामिल हैं।


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