भगवान बुद्ध ने सम्पूर्ण भारतवर्ष में फैलाया बौद्ध धर्म का ज्ञान

बौद्ध धर्म को दुनिया भर के चार बड़े धर्मों में से एक माना जाता है और गौतम बुद्ध को इस धर्म का संस्थापक कहा जाता है। आज अगर दुनिया भर में बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो इसका सारा श्रेय गौतम बुद्ध को जाता है। एक राजकुमार होते हुए भी जिसमें कभी राज सिंहासन पाने की लालसा नहीं थी। संन्यास जीवन ने उन्हें इस कर प्रेरित किया कि उन्होंने संन्यासी बनने के लिए अपने गृहस्थ जीवन के साथ सभी सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया। एक दिन जब सिद्धार्थ रथ पर सवार होकर कपिलवस्तु के भ्रमण के लिए निकले तब उन्होंने रास्ते में चार अलग-अलग दृश्यों के देखा जिससे वो काफी विचलित हुए-
1.एक बूढ़ा व्यक्ति, 2.एक बीमार व्यक्ति 3.एक मृत आदमी का शव, 4.एक संन्यासी। इन चारों दृश्यों को देखने के बाद सिद्धार्थ के मन में सांसारिक जीवन के प्रति विरक्ति की भावना ने घर कर लिया। सांसारिक समस्याओं से दुखी होकर सिद्धार्थ ने 29 साल की उम्र में अपना राज-पाट, अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़कर संन्यासी जीवन को अपनाया। बिना अन्न जल ग्रहण किए सिद्धार्थ ने करीब 6 साल तक कठिन तपस्या की। जिसके बाद करीब 35 साल की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे, पीपल के पेड़ के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्घार्थ गौतम बुद्ध के नाम मशहूर हुए और जिस जगह उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ उसे बोधगया के नाम से जाना जाता है, जो अब बिहार में है।
गौतम बुद्ध के सिद्धांत
गौतम बुद्ध ने इंसानों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने के लिए कई सिद्धांत कई उपदेश दिए जिससे यह साबित होता है कि इंसान का दिमाग ही उसकी तमाम खुशियों और गमों के लिए जिम्मेदार होता है। गौतम बुद्ध ने जीवन जीने का तरीका बताते हुए कहा है कि हर इंसान के अंदर ही शांति का वास होता है जबकि वो उसे बाहरी दुनिया में तलाश करता है। इंसान अपने विचार, अपने व्यवहार और अपने नजरिए में सकारात्मक बदलाव लाकर अपनी तमाम परेशानियों को खुद-ब-खुद खत्म कर सकता है।

खुद की परेशानियों को लेकर कई बार हमारे दिमाग में द्वंद चलता है, जिसे सिर्फ हम अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाकर ही दूर कर सकते हैं।


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