आइडिया में तो है दम… नो उल्लू बनाविंग!

देश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आज एक नया पांसा फेंका है। एक आइडिया जो बदल दे आपकी दुनिया…. एक मशहूर मोबाइल कंपनी के विज्ञापन का यह स्लोगन ही भाजपा को चुनाव के दौरान नए वोटबैंक को खींचने का आइडिया दे गया। हर हाथ में स्मार्ट फोन वाली नई जनरेशन के लिए भाजपा ‘आइडिया में है दम? पूरा करेंगे हम!Ó स्लोगन के साथ ‘समृद्ध मध्यप्रदेशÓ अभियान लेकर आई है।
व्हाट एन आइडिया सर जी! स्मार्ट फोन और गूगल बाबा के दम पर खुद को दुनिया भर का बुद्धिमान मानने वाली युवा पीढ़ी को लुभाने का इससे बेहतर आइडिया कोई और नहीं हो सकता, वो भी ठीक चुनाव के मौके पर। भाजपा के अत्याधुनिक संचार सुविधाओं से युक्त रथ आज से यूथ हंटिंग पर निकल गए हैं। कॉलेज परिसर, यूथ कैंपस के साथ सार्वजनिक स्थान पर यह युवाओं को आकर्षित करेंगे और मध्यप्रदेश को बदलने का सुझाव लेंगे। इस आइडिया के साथ कि आइडिया में है दम? पूरा करेंगे हम! मजे की बात है कि भाजपा का यह विज्ञापन बनाने वालों ने ही आइडिया की दमदारी पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया है। इतना ही नहीं पूरा करेंगे हम उद्घोष भी विस्मयबोधक चिन्ह के साथ है। यदि थोड़ा और विस्तार में जाएं तो इस अभियान से मिलने वाले सुझाव घोषणा पत्र में शामिल करने से भाजपा प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर साफ इंकार कर चुके हैं। उनकी सफाई है कि घोषणा पत्र तैयार करने की उनकी अलग व्यवस्था है। समृद्ध मध्यप्रदेश अभियान में मिले सुझाव सरकार बनने के बाद विचार में आएंगे। तोमर अपनी बात को वजन देने के लिए सीएम हाउस में हुईं पंचायतों से निकले आइडिया पर अमल की दुहाई देते हैं।
बहरहाल सरकार फिर भाजपा की बनी तो उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश के युवाओं के आइडिया से चलेगी और राज्य को समृद्ध बनाएगी। लेकिन उसके लिए जो प्रयत्न किए जा रहे हैं और जो टारगेट ग्रुप चुना गया है वह भाजपा के योजनाकारों के दमदार आइडिया की दाद देने लायक है। सरकार में रहते हुए 2008 के चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की
आधी आबादी यानी नारी शक्ति पर फोकस कर चुनाव लड़ा था और लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी सामाजिक सरोकारों की योजनाओं के जरिए पहली बार चौके-चूल्हे तक पहुंच बनाई थी। इसके बाद 2013 के चुनाव में पुरानी योजनाओं को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना, अंत्योदय अन्न योजना की चाशनी में डूबोकर बुजुर्ग और उनके बेटे-बेटियों तक को लुभाया था। कभी सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास तक सीमित रहने वाली सरकार को लोगों के सुख-दुख का सहभागी बनाने का यह सफल आइडिया भाजपा को रास आया। इस बार सिंहस्थ और नर्मदा सेवा यात्रा के जरिए धार्मिक रुझान दिखाने के साथ किसान और गरीबों के लिए बिजली बिल माफी और संबल योजना का सहारा तो है ही, एट्रोसिटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा मुखर युवाओं को इन मुद्दों से हटा कर आइडिया के दम पर खुद से जोडऩे का तरीका भाजपा ने खोजा है। यह अभियान ‘चौथी बार शिव-राजÓ के लिए एक नया वोट बैंक खड़ा करने की कोशिश है। इसीलिए ‘मेरा सुझाव, मेरा चुनावÓ जैसा आकर्षक जुमला ईजाद किया गया है। जिसकी जद में 40 साल से कम उम्र के प्रदेश के 56 फीसदी मतदाता हैं। इनमें भी खास फोकस 18 से 29 साल के एक करोड़ 53 लाख से अधिक वोटरों पर है, जिनमें से करीब आधे ऐसे हैं जो पहली बार मताधिकार का प्रयोग करेंगे। रोजगार तलाशते-तलाशते परंपरागत प्रचार के तरीकों के बीच सत्ता में सहयोग के लिए अपनी आवाज का रास्ता खोज रही ‘हंगरी क्याÓ वाली पीढ़ी को भाजपा का यह आइडिया ‘खुशियों की होम डिलीवरीÓ की ‘राइट च्वाइसÓ लग सकता है। बस ध्यान रखना होगा कि चुनाव नतीजे आने के बाद यही पीढ़ी कहीं यह बोलने को मजबूर न हो जाए कि ‘नो उल्लू बनाविंगÓ।


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