आदमखोर बाघ की एमपी में एंट्री, अनूठा रिकार्ड भी अपने नाम कराया

सच संवाददाता,भोपाल
महाराष्ट्र की सीमा से एक आदमखोर बाघ ने मप्र में एंट्री की है। दो लोगों का शिकार करने के बाद कल बैतूल जिले के सालबर्डी क्षेत्र में यह बाघ दिखाई दिया। इस बाघ ने सबसे लंबी दूरी की यात्रा करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कराया है। उसने करीब 72 दिन में 400 किलोमीटर की दूरी तय की है और इसकी यात्रा लगातार जारी है। फिलहाल वह सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से करीब 70 किमी दूर है। इससे पहले वर्ष 2011 में कर्नाटक के एक बाघ ने 15 महीने में 280 किमी का सफर तय किया था।
जानकारी के मुताबिक,नए इलाके की तलाश में यह बाघ 15-20 अगस्त के बीच महाराष्ट्र के चंद्रपुर थर्मल पॉवर स्टेशन से निकला। एमपी की सीमा में प्रवेश करने के बाद यह बाघ फिलहाल बैतूल जिले में सक्रिय है। गुरुवार को बैतूल जिले के सालबर्डी क्षेत्र में यह बाघ दिखाई दिया। इससे पहले मुलताई और आठनेर में इस बाघ को देखा गया था। वन अमले को बाघ के पगमार्ग भी मिले हैं। ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग का अमला लगातार बाघ की निगरानी कर रहा है। वन्य प्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि यह बाघ दो लोगों का शिकार करने के बाद आदमखोर बन गया है। इसलिए ज्यादा चिंता की बात है। इधर, बाघ के प्रवेश की सूचना पर भोपाल स्थित वन मुख्यालय ने स्थानीय अमले को अलर्ट कर दिया है। ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है।
आसान नहीं रहा सफर
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सफर बाघ के लिए आसान नहीं रहा है। बाघ ने इस दौरान अमरावती-नागपुर एनएच-6 को पार किया। इस क्रम में कई गांवों से वह गुजरा। बैतूल जिले में प्रवेश से पहले उसे वर्धा डैम के ऊपर नहर को पारकर निकलना पड़ा। इस यात्रा के दौरान कई पड़ावों पर इस बाघ को पकडऩे की भी कोशिश की गई। लेकिन कई जगह ग्रामीणों के शोर या फिर कुछ अन्य परिस्थितियों के कारण अभी तक बाघ को पकड़ा नहीं जा सका है। बताया जा रहा है कि किसी भी बाघ द्वारा सबसे अधिक दूरी तय करने के आंकड़ों के मुताबिक यह देश में तीसरा मामला है।
दो लोगों का कर चुका शिकार
इससे पहले इस बाघ ने महाराष्ट्र में दो लोगों का शिकार किया था। बताया जा रहा है कि शुरुआत में करीब 55 दिनों में लंबी दूरी और कई फासलों को पार करने वाले बाघ ने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। पर, बीते 19 अक्टूबर को उसने धमनगांव रेलवे क्षेत्र में एक किसान राजेंद्र निमकर (48) को मारा। यहां वन विभाग की तरफ से उसे पकडऩे के लिए भैंस के एक बच्चे को बांधा गया था। बाघ ने उसे भी मार डाला और आगे बढ़ गया। 22 अक्टूबर को यहां से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर अंजनसिंगी में बाघ ने एक और किसान मोरेश्वर वाके (50) को अपना शिकार बनाया। दोनों ही किसानों को बाघ ने तब शिकार बनाया, जब वे खेत में घास काट रहे थे।


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