‘बाबूजीÓ को सम्मानजनक विदाई देने के मूड में पुराने भाजपाई और कांग्रेस भी

संतोष चौधरी ॥ भोपाल
मंत्री की कुर्सी छिनने के बाद से न केवल पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह बल्कि उनके पुराने समर्थक और नेता भी स्वयं को पार्टी और संगठन में उपेक्षित मान रहे थे। अब इन लोगों का मानना है कि होशंगाबाद की राजनीति में बाबूजी के नाम से पहचाने जाने वाले सरताज सिंह को आखिरी बार जिताकर राजनीति से सम्मानजनक विदाई होना चाहिए। ऐसी ही इच्छा सरताज सिंह भी कई बार जाहिर कर चुके हैं।
इसलिए सरताज सिंह ने अपने छह दशक की राजनीति में इतना बड़ा फैसला लेकर भाजपा छोड़ कांगे्रस का दामन थामा है और वे होशंगाबाद से भाजपा उम्मीदवार व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा से मुकाबला करने को तैयार हैं। सरताज सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला भारी मन से लिया है। इस फैसले से उनके पुराने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को अचरज हुआ। इसलिए सरताज सिंह ने इन समर्थकों से चर्चा करने के बाद ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे का फैसला किया। अब ये सभी समर्थक सरताज सिंह के साथ हैं। असल में जब सरताज सिंह से 75 के पार का फॉर्मूला देकर मंत्री पद छीना गया था, तब से समर्थक भी उपेक्षित मानकर चल रहे थे। ये लोग घर बैठ गए थे। सरताज सिंह के कई समर्थकों को विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने साइड लाइन कर दिया था, जिसके चलते इन समर्थकों ने घर बैठना ही उचित समझा। अब ये लोग घर से बाहर आकर सरताज सिंह के पक्ष में काम करने लगे हैं। अब इन लोगों का मानना है कि बाबूजी लंबे समय तक क्षेत्र का विकास करने के साथ ही लोगों के सुख-दुख में खड़े हुए हैं।
संगठन ने मंत्री पद छीनकर उनके साथ ठीक नहीं किया है। पार्टी में धीरे-धीरे उनका सम्मान भी जाता रहा। इसलिए ये कार्यकर्ता और समर्थक अब सरताज सिंह के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। ये लोग अब घर से निकलकर चुनावी मैदान में सरताज के साथ खड़े हैं। वे चाहते हैं कि बाबूजी को आखिरी बार जिताकर उनकी सम्मानजनक विदाई हो। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का भी कुछ ऐसा ही मानना है।
भाजपा की जड़ें उखाडऩे के पक्ष में कांग्रेसी
होशंगाबाद क्षेत्र के कांग्रेसियों के पास भी सरताज सिंह के अलावा कोईविकल्प नहीं था। होशंगाबाद की कांग्रेस की राजनीति में विजय दुबे काकू भाई और मानक अग्रवाल का गुट सक्रिय है। मानक स्वयं लंबे समय टिकट की दौड़ में थे, लेकिन कांग्रेस को भाजपा से यह सीट छीनने के लिए दमदार उम्मीदवार नहीं मिल रहा था। सरताज सिंह के कांग्रेस में आने के बाद नए सिरे से राजनीतिक समीकरण बने और बिगड़े। बताया जा रहा है कि काकू भाई खेमा पूरी तरह सरताज सिंह के साथ खड़ा है। काकू भाई की उनकी मुलाकात हो चुकी है। वहीं, मानक अग्रवाल को सरताज सिंह की उम्मीदवार रास नहीं आ रही है। यही वजह है कि टिकट की दौड़ में शामिल मानक अग्रवाल अभी इटारसी व होशंगाबाद सरताज सिंह से मुलाकात करने नहीं पहुंचे। मानक के समर्थक जरुर सरताज सिंह के साथ आ गए हैं। सरताज समर्थकों का कहन है कि जल्द ही मानक की नाराजगी भी दूर की जाएगी। असल में होशंगाबाद से कांग्रेस को भाजपा की जड़े हिलाने के लिए कोई दमदार नेता नहीं मिल रहा था। सरताज सिंह के बाद उनकी उम्मीद पूरी हुई है। असल में इन कांग्रेसियों का कहना है कि सरताज क्षेत्र में कांग्रेस की जड़े हिलाने में सक्षम है। 20 साल से इस क्षेत्र में भाजपा की जड़े गहरी हो गईथी।


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