कर्जमाफी के बाद अब गोशालाओं की बारी

डॉ. अनिल सिरवैया ॥ भोपाल
किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा करने के लिए ‘जय किसान कृषि ऋण माफी योजनाÓ लागू करने के बाद अब प्रदेश की कमलनाथ ने सरकार ने अपने वचन-पत्र के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण वचन ‘गो-शालाÓ पर फोकस कर लिया है। देश और प्रदेश की राजनीति में चुनावी मुद्दा बनने वाली ‘गायÓ को संरक्षित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में गो-शाला खोलने के लिए सरकार में कामकाज शुरू हो गया है। सरकार ने प्रदेश के 17 ऐसे जिले चिन्हित कर लिए हैं, जहां आवारा पशुओं की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। इन आवारा पशुओं में सर्वाधिक संख्या गायों की है। गो-शालाएं खोलने की शुरुआत इन्हीं जिलों से होगी।
प्रदेश में कुल 23 हजार ग्राम पंचायतें हैं। अपने वचन के मुताबिक कांग्रेस सरकार को गो-वंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए इन सभी में गो-शालाएं खोलनी हैं। राज्य के पशुपालन विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। विभाग ने प्रदेश में 17 जिले ऐसे चिन्हित किए हैं, जहां आवारा पशु बहुत बड़ी समस्या बन गए हैं। आवारा पशुओं के आतंक के कारण इन जिलों में कईकिसानों ने खेती करना छोड़ दिया है। ये 17 जिले ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और महाकौशल संभाग के हैं। विभाग ने इन जिलों के कलेक्टरों से आवारा पशुओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
नए मॉडल से जुटाएंगे राशि
प्रत्येक पंचायत में गो-शालाएं खोलने के लिए हालांकि सरकार के पास वित्तीय परेशानियां हैं लेकिन फिलहाल इसका हल क्लस्टर में गो-शालाएं खोलने के रूप में निकाला गया है। विधानसभा से हाल ही में पारित हुए द्वितीय अनुपूरक बजट में पशुपालन विभाग को 50 करोड़ रूपए दिए गए हैं। इसमें से अधिकांश राशि गो-शालाओं के निर्माण पर खर्च की जाएगी। गो-शालाओं के लिए राशि जुटाने के लिए भी सरकार एक मॉडल पर काम कर रही है।
8-10 पंचायत के बीच एक गो शाला
विभाग के सूत्रों के मुताबिक गो शालाएं खोलने का काम क्लस्टर बनाकर किया जाएगा। सबसे पहले आठ से दस पंचायतों के क्लस्टर में एक गो-शाला का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद इसे घटाकर पांच पंचायतों में एक गो-शाला बनेगी और फिर आखिर में जिले की प्रत्येक पंचायत में एक-एक गो-शाला बनाई जाएगी।
आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए अभियान
इसी कड़ी में सरकार सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए अभियान भी शुरू करने जा रही है। इसके लिए सभी नगरीय निकायों और जिला पंचायतों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसकी शुरूआत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन जैसे बड़े जिलों से हो रही है, जहां यह समस्या ज्यादा है। फिलहाल इन आवारा पशुओं को इन शहरों के आसपास निजी गो-शालाओं में शिफ्ट किया जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं में होती है गायों की मौत
स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर होने वाली ज्यादातर दुर्घटनाएं आवारा पशुओं के सड़कों पर बैठे होने के कारण होती हैं। इन दुर्घटनाओं में गायों की मौत हो जाती हैं या फिर वे गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं।
विभाग ने 17 जिलों की पहचान की है, जहां आवारा मवेशी एक बहुत बड़ी समस्या है। सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशी दिखाई दे रहे हैं और किसानों ने आवारा पशुओं के खतरे के कारण कई गांवों में जमीन पर खेती करना बंद कर दिया है। जल्द ही इन जिलों से रिपोर्ट प्राप्त होगी, जिसके बाद गो-शालाएं बनाने का काम शुरू होगा।
लाखन सिंह, पशुपालन मंत्री, मप्र


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