वसंत पंचमी पर सरस्वती के साथ कामदेव-रति की पूजा का भी विधान

सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सरस्वती पूजन का विधान है। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि इस साल वसंत पंचमी की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति है। दरअसल पंचमी तिथि 2 दिन लग रही है। देश के कुछ भागों में चतुर्थी तिथि 9 तारीख को दोपहर से पहले ही समाप्त हो रही है और पंचमी तिथि शुरू हो रही है और 10 तारीख को पंचमी तिथि 2 बजकर 9 मिनट तक है।
सरस्वती पूजन का शुभ समय
वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन कामदेव और इनकी पत्नी रति धरती पर आते हैं और प्रकृति में प्रेम रस का संचार करते हैं इसलिए वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के साथ कामदेव और रति की पूजा का भी विधान है। पंडितजी के अनुसार शास्त्रों में पूर्वाह्न से पूर्व सरस्वती पूजन करने का नियम बताया गया है इसलिए 10 तारीख को सुबह 6 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक सरस्वती पूजन करना शुभ मंगलकारी होगा।
पूजन में रखें इन बातों का ध्यान
देवी सरस्वती ज्ञान और आत्मिक शांति की प्रतीक हैं। इनकी प्रसन्नता के लिए पूजा में सफेद और पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिए। देवी सरस्वती को प्रसाद स्वरूप बूंदी, बेर, चूरमा, चावल की खीर का भोग लगाना चाहिए। इस दिन से बसंत का आगमन हो जाता है, इसलिए देवी को गुलाब अर्पित करना चाहिए और गुलाल से एक-दूसरे को टीका लगाना चाहिए।
सरस्वती के साथ राधा कृष्ण की पूजा भी
वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के साथ ही राधा-कृष्ण की पूजा का भी शास्त्रों में उल्लेख मिलता है। दरअसल राधा और कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं और इस दिन कामदेव का पृथ्वी पर आगमन होता है। प्रेम में कामुकता पर नियंत्रण और सादगी के लिए राधा-कृष्ण की पूजा का विधान सदियों से चला आ रहा है। वसंत पंचमी के दिन पहली बार राधा-कृष्ण ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया था इसलिए वसंत पंचमी पर गुलाल लगाने की परंपरा भी चली आ रही है।


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