सवा सौ साल से गुफा में पूजे जाते हैं शिवलिंग

भोपाल के लालघाटी में स्थित करीब दो सौ साल प्राचीन एक गुफा में यह शिवलिंग लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ हुआ। यहां हर सोमवार को भक्तों का मेला लगता है। पहाड़ों के भीतर होने के कारण इस मंदिर की सुंदरता लोगों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। यहां हर शिवरात्रि को मेला भी लगता है। इसके अलावा यहां अनेक धार्मिक और सामाजिक आयोजन भी होते हैं। यह स्थान ईदगाह पहाड़ी से जुड़ा हुआ है। इस पहाड़ी के भीतर एक गुफा सन् 1830 में पता चली थी। इसके बाद यहां भक्तों ने सन् 1901 में इसमें शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी। वर्ष 1953 में यहाँ हनुमान प्रतिमा स्थापित की गई। 1960 में मंदिर के आसपास विस्तार करके स्थान का विकास किया गया। यहां एक विशाल परिसर है और संस्कृत महाविद्यालय भी है। यहां अभिषेक के लिए भी भक्तों की कतार लगती है। गुफा मंदिर की ओर से आश्रम, संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय, आयुर्वेदिक औषधालय, वाचनालय, गोशाला और संत सेवा का कार्य वर्षों से किया जा रहा है।
सात गुफाएं हैं यहां
सात प्राकृतिक गुफाएं और एक गुफा के प्राकृतिक जल में विराजे स्वयंभू भगवान शिव, जिनके दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के मन की कामनाएं पूरी हो जाती हैं। यह पुण्य प्रताप भोपाल के गुफा मंदिर में है। जहां सालों से भगवान शिव की पिंडी प्राकृतिक जल में स्थापित है। भीषण गर्मी में भी यहां कभी सूखा नहीं पड़ता। गुफा मंदिर और आश्रम परिसर 7 प्राकुतिक गुफाओं से गिरा हुआ है। परिसर में भव्य शिवलिंग की स्थापना की गई है। एक गुफा में स्वयंभू शिव की पिंडी है जबकि बाकी गुफाओं में संस्कृत के विद्यार्थी रह रहे हैं।


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