सहकारी संस्थाओं के परिसर में नहीं होंगी चुनावी सभाएं, बैठकें

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
सहकारी संस्थाओं के परिसर या भूमि पर चुनावी सभा नहीं हो सकेगी। इसमें कटआउट भी नहीं लगाए जा सकेंगे। किसी भी शासकीय या सहकारी समिति के अधिकारी या कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के चुनाव एजेंट या प्रचारक के रूप में काम नहीं करेंगे। चुनाव के दौरान संस्थाएं नया निर्माण, नई संपत्ति की खरीदी या बिक्री भी नहीं कर सकेंगी। महत्वपूर्ण नीलामियां भी लंबित रखी जाएंगी।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सहकारिता विभाग ने भी अपनी संस्थाओं के अधिकारियों, कर्मचारियों और पदाधिकारियों के लिए इस तरह की आचार संहिता जारी की है। लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक ब्लॉक, तहसील, जिला और संभाग स्तर पर गठित सहकारी समितियों द्वारा कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। सहकारी संस्थाओं के अधिकारी, कर्मचारी और पदाधिकारी किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश न कर पाएं, इसके लिए यह गाइडलाइन जारी की गई है। गाइडलाइन के तहत यह बिंदु भी है कि सहकारी संस्थाओं के परिसर में या इनकी अगुआई में ऐसा कोई सम्मेलन, गोष्ठी या बैठकें नहीं जा सकेंगी, जिससे किसी भी दल के उम्मीदवार को उनके प्रचार-प्रसार से अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की संभावना हो। सहकारी संस्थाओं द्वारा पट्टे और विशेष सुविधाएं भी नहीं बांटी जा सकेंगी। रैली, चुनावी सभा आदि के लिए सहकारी समितियों के धन और संसाधनों का उपयोग नहीं किया जाएगा। किसी भी सहकारी संस्था द्वारा चुनाव की अवधि में मतदाताओं को प्रभावित करने वाले विज्ञापन जारी नहीं किए जाएंगे। सहकारिता आयुक्त केदार शर्मा ने प्रदेश की सभी सहकारी संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ और सभी सहकारी संस्थाओं के लिए यह गाइडलाइन जारी की है। आयुक्त ने कहा है कि इस गाइडलाइन के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग की आचार संहिता का भी पालन किया जाए।
इन कामों पर भी लागू रहेगी आचार संहिता
> जिन सहकारी संस्थाओं द्वारा अतिथिगृह चलाए जा रहे हैं, उनका उपयोग किसी भी राजनीतिक व्यक्ति व दल द्वारा नहीं किया जाएगा।
> सहकारी संस्थाओं द्वारा संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पदाधिकारियों, प्रशासकों और नामांकित समितियों को जो स्टेनो, लिपिक या कर्मचारी आदि उपलब्ध कराए गए हैं, चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक के लिए उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
> किसी भी सहकारी संस्था के प्रबंधन या प्रशासक द्वारा अपने बायलॉज में दर्शाए उद्देश्यों के तहत नियमित व्यवसाय को छोड़कर ऐसे नीतिगत निर्णय नहीं लिए जाएंगे, जिससे किसी व्यक्ति विशेष या वर्ग को सीधे या परोक्ष रूप से फायदा पहुंचता हो या फायदा पहुंचने की संभावना हो।
> संस्थाओं के वाहनों का उपयोग किसी भी तरह से चुनाव प्रचार या किसी उम्मीदवार के चुनाव संबंधी कार्यों में नहीं किया जाएगा। अशासकीय पदाधिकारियों को आवंटित वाहन वे खुद ही वापस कर दें।


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