जब रावण के मुंह से निकला ‘शत्रु हो तो श्री राम जैसाÓ

कहते हैं कि एक बार, भगवान श्रीराम ने जामवंत को बलवान व शक्तिशाली रावण के पास एक खास निमंत्रण के साथ भेजा। वहीं, जामवंत जब रावण के दरबार में गए, तो उनका पूरे मान सम्मान के साथ भव्य स्वागत किया गया। यही नहीं, उस प्रसंग के अनुसार रावण ने जामवंत के स्वागत में उन्हें अपने सिंहासन पर भी बैठा दिया था। दरअसल, ऐसा कहा जाता है कि जामवंत ने रावण से कहा कि मैं प्रभु श्रीराम के कहने पर आपको आचार्य पद धारण करने का निमंत्रण लेकर आया हूं। उधर जामवंस के मुख से यह सब सुनकर रावण काफी हैरान व परेशान हो गया। रावण के अलावा भी उस सभा में मौजूद बाकी लोग भी काफी हैरानी में पड़ गए। ऐसे में रावण तुरंत जामवंत से प्रश्न करते हैं कि अगर मैं श्रीराम का यह खास निमंत्रण ठुकरा दूं तो, फिर इसका परिणाम क्या होगा? रावण के इस सवाल पर जामवंत ने बस एख ही बात कही कि यह तो आपकी मर्जी है। बहुत देर तक गहन सोच विचार के बाद रावण ने श्रीराम का आचार्य बनने का निमंत्रण खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। दूसरी ओर रावण के इस फैसले से सभा में बैठे सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। तब रावण ने कहा कि सभी लोग मुझे एक राक्षस के रूप में ही जानते हैं, लेकिन अब मुझे एक आचार्य के रूप में भी याद किया जाएगा। यह वही खास समय था जब रावण अपनी मुख से यह कहते हैं कि शत्रु हो तो राम जैसा।


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