जून में महंगी होगी बिजली, दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं

अनिल सिरवैया ॥ भोपाल
पहले विधानसभा और अब लोकसभा चुनाव के कारण फिलहाल प्रदेश में बिजली के दाम नहीं बढ़़ाए जा रहे हैं लेकिन दो महीने बाद बिजली की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय हो गया है। बिजली कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग में टैरिफ पिटीशन दायर कर दी है। इसमें वर्ष 2019-20 के लिए डेढ़ प्रतिशत की वृद्धि मांगी गई है। जून में इस पिटीशन पर फैसला आने की संभावना है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए 2018-19 में सरकार ने टैरिफ नहीं बढ़ाया था लेकिन इस बार टैरिफ बढऩे की पूरी संभावना है।
वर्ष 2018 में सरकार ने बिजली टैरिफ में कोई बदलाव नहीं करते हुए वर्ष 2017-18 के टैरिफ को ही निरंतर रखा था। पुराने दरें ही 31 मार्च 2019 तक प्रभावी थीं। 1 अप्रैल से नई दर लागू होनी थी, लेकिन बिजली नियाकम आयोग से टैरिफ पर फैसला नहीं हो सका। फैसला नहीं होने के कारण विद्युत वितरण कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों ने कंपनियों ने मागदर्शन मांगा कि बिजली दर की स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके जवाब में कंपनी ने एक परपिपत्र जारी कर सभी क्षेत्रीय अधिकारियों से कहा है कि आयोग में 6 मार्च 2019 को टैरिफ पिटीशन दायर की जा चुकी है। इस पर आयोग में फैसला आना शेष है। इसलिए फैसला आने तक वर्ष 2018-19 की ही दरें लागू रहेंगी। अगले दो महीने में याचिका पर सुनवाई पूरी हो जाएगी और जून में फैसला आने की संभावना है।
इन तीन कारणों से बिजली महंगी होने की संभावना
> भाजपा सरकार ने मजदूरों के लिए संबल योजना लागू की थी। इस योजना के तहत मजूदरों की बकाया राशि माफ की गई। बकाए की 50 फीसदी की राशि कंपनियों को भुगतना पड़ी। ब्याज भी माफ किया। इससे कंपनियों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई।
> मजदूरों को 200 रुपए प्रति महीना के हिसाब से बिजली दी जा रही है। वर्तमान सरकार ने इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत 200 रुपए प्रति महीने बिजली देने की योजना जारी रखी है। मजदूर करोड़ों रुपए की बिजली जला रहे हैं। सरकार से सब्सिडी का पैसा भी नहीं आ रहा है। इससे कंपनी के ऊपर संकट आ गया है।
> कंपनियों की राजस्व वसूली भी घट गई है। साथ ही लाइन लॉस बड़ा है। इससे कंपनियों का घाटा बड़ा है। इन सभी कारणों के चलते बिजली महंगी होना तय है।
चुनाव की वजह से मिलती रही सस्ती बिजली
वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे। इसे देखते हुए भाजपा सरकार ने टैरिफ नहीं बढ़ाया, क्योंकि टैरिफ से उसे नुकसान उठाना पड़ सकता था। भाजपा सरकार ने वर्ष 2015, 2016, 2017 में लगातार टैरिफ बढ़ाया था। 101 से 300 व 300 ऊपर वाले स्लैब में सबसे ज्यादा वृद्धि की गई। राज्य में सरकार बदल गई, लेकिन लोकसभा चुनाव आ गए। इस वजह से नई सरकार ने लोकसभा चुनाव के कारण अप्रैल में नई दरें टाल दीं।
पिछले चार साल में दर वृद्धि पर एक नजर
स्लैब 2015 2016 2017 2018
30 यूनिट 2.90 2.90 3.10 3.10
50 यूनिट 3.40 3.65 3.85 3.85
51-100 4.05 4.35 4.70 4.70
101-300 5.20 5.60 6.00 6.00
300 अधिक 5.70 6.10 6.30 6.30
(दर प्रति यूनिट रुपए है। वर्ष 2017 व 2018 में रेट एक समान रहे।)
आयोग में पिटीशन दायर कर दी है और डेढ़ प्रतिशत की वृद्धि मांगी है। सुनवाई कब से शुरू होगी। यह फैसला आयोग को करना है।
> एसके मेश्राम, सीजीएम, पावर मैनेजमेंट कंपनी


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