ईरान से तेल आयात पर भारत को मिली छूट हुई खत्म, अमेरिका के इस फैसले का होगा कितना असर?

22 अप्रैल को जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने छूट जारी नहीं करने का फैसला लिया तो शेयर मार्केट 495 अंकों से टूट गया, जिससे निवेशकों के करीब 2 लाख करोड़ रुपये एक झटके में डूब गए.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

नई दिल्ली: आखिरकार जिस बात का डर था, वह हो गया. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से तेल खरीदारों को और ज्यादा छूट देने से इनकार कर दिया. नवंबर 2018 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एकबार फिर सेईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था. भारत, चीन समेत कुछ देशों को 6 महीने तक लिमिटेड मात्रा में तेल आयात की छूट दी गई थी जो मई महीने के शुरुआत में खत्म हो रही है. इस खबर के साथ ही शेयर मार्केट 495 अंकों का गोता लगा दिया. निवेशकों के करीब 2 लाख करोड़ रुपये एक झटके में डूब गए.

बता दें, ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है. भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा कच्चा तेल इराक और सऊदी अरब से खरीदता है. जबकि, चीन के बाद भारत ईरान से सबसे ज्यादा आयात करता है. प्रतिबंध के बाद भारत दूसरे निर्यातक सऊदी अरब, मेक्सिको, इराक, कुवैत जैसे देशों से ज्यादा तेल आयात करेगा. ट्रंप ने भी ट्विटर पर लिखा कि, ‘ईरान पर अब हमारी पूर्ण पाबंदी के बाद सऊदी अरब और ओपेक (तेल निर्यातक देशों के संगठन) के अन्य देश तेल आपूर्ति में किसी भी कमी की भरपाई करेंगे.’

US Sanction on Iran, oil purchase waiver not continued by Donald Trump
नवंबर के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात को लगभग आधा कर दिया था. (फाइल)

बता दें, नवंबर के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात को लगभग आधा कर दिया था. भारत ने ईरान से 2017- 8 वित्त वर्ष में जहां 2.26 करोड़ टन कच्चे तेल की खरीदारी की थी वहीं प्रतिबंध लागू होने के बाद इसे घटाकर 1.50 करोड़ टन सालाना कर दिया गया. बता दें, भारत ईरान से रुपये में तेल का आयात खरीदता था, इसकी वजह से डॉलर रिजर्व पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता था. अब भारत को तेल आयात की कीमत डॉलर में चुकानी होगी. इसका असर फॉरेन रिजर्व पर पड़ेगा. अर्थव्यवस्था के लिए यह परिस्थिति सकारात्मक नहीं है. ट्रंप पशासन के इस फैसले के पीछे की मंशा ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाने की है. बता दें,


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