चालान पेश कराने आरोपी लगा रहे लोकायुक्त कार्यालय के चक्कर

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
पुलिस फायर सर्विस के बहुचर्चित होज पाइप घोटाले के आरोपी अब लोकायुक्त पुलिस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं कि जल्द चालान पेश हो जाए, ताकि उनके पेंशन प्रकरण का निराकरण हो सके। करीब डेढ़ साल पहले लोकायुक्त ने होज पाइप घोटाले में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है। इसमें पुलिस फायर सर्विस के तत्कालीन एडीजी वीके पंवार और मुख्य फायर अधिकारी बीएस टोंगर को आरोपी बनाया गया है। मामला विवेचना में है।
घोटाले के आरोपी टोंगर लोकायुक्त पुलिस अफसरों से मुलाकात कर इस मामले में शीघ्र विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश करने की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि विवेचना में तथ्य एकत्र किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उक्त अधिकारियों ने डीजीएसएनडी के रेट को दरकिनार कर होज पाइप बाजार से महंगी दरों पर खरीदे थे। जबकि सरकारी कार्यों में क्रय की जाने वाली सामग्री डीजीएसएनडी द्वारा निर्धारित दरों पर क्रय की जाती है। सूत्रों के मुताबिक होज पाइप आवश्यकता से अधिक खरीदकर शासन को आर्थिक क्षति भी पहुंचाई गई थी।
फायरमैन से बने फायर अधीक्षक
बीएस टोंगर दिल्ली पुलिस फायर सर्विस में पदस्थ थे। वे प्रतिनियुक्ति पर मप्र पुलिस फायर सर्विस में आए। इसके बाद पदोन्नत होकर फायर सर्विस अधीक्षक बन गए और उन्हें राजपत्रित अफसर का दर्जा मिल गया। उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में फायर सर्विस के लिए बिल्डरों, औद्योगिक संस्थानों को नियम विरुद्ध एनओसी जारी करने के मामले में अपराध दर्ज है। यह मामला इंदौर के विशेष न्यायालय में विचाराधीन है। इसकी ट्रायल चल रही है। टोंगर फायर सर्विस के भोपाल मुख्यालय के अलावा इंदौर फायर सर्विस स्टेशन में पदस्थ रहे हैं। हालांकि कुछ साल पहले वे रिटायर हो चुके हैं। फायर सर्विस में पदस्थ रहने वाले आईपीएस अफसरों से टोंगर के अच्छे संबंध रहे हैं।
इंदौर से आए चर्चा में
दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल में इंदौर के एक अस्पताल को फायर लाइसेंस के लिए एनओसी जारी करने के लिए एक करोड़ रुपए की मांगी गई कथित रिश्वत का मामला सामने आने के बाद टोंगर चर्चा में आए थे। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस मामले की शिकायत की गई थी। इसके बाद उनके करीबी रहे आईपीएस अफसर भी संदेह के घेरे में आने लगे। इस मामले के बाद अफसरों ने उनसे दूरी बनाना शुरू कर दिया था। टोंगर की शैक्षणिक डिग्री भी शंका के दायरे में रही है। मूलत: राजस्थान निवासी टोंगर की दिल्ली से मप्र फायर सर्विस में प्रतिनियुक्ति किस आधार पर दी गई थी, इसका कारण भी स्पष्ट नहीं हुआ है।


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