वैशाख अमावस्या के साथ शनिश्चरी अमावस्या बेहद शुभ व मंगलकारी

अमावस्या की तिथि को धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या की तिथि यदि शनिवार को पड़ रही हो तो यह और भी मंगलकारी मानी जाती है। इस बार जातकों को इस विशेष संयोग का लाभ मिल रहा है। इस बार यह अमावस्या आज 4 मई को है और इस दिन शनिवार भी है। यह साल की दूसरी शनिश्चरी अमावस्या है। इससे पहले 4 जनवरी को साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या पड़ी थी। वहीं साल की तीसरी और आखिरी शनिश्चरी अमावस्या 28 सितंबर को है। आज शनि मंदिरों में सुबह से ही शनि पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है।
मंत्रों का जप है लाभकारी
रुद्राक्ष की माला से शनिदेव के मंत्रों का जप करें। बेहतर होगा कि आप 5 माला जप करें। शनि देव का बीज मंत्र- ओम प्रां प्रीं प्रौं श: शनैश्चराय नम:Ó आप चाहें तो शनि पत्नी मंत्र और तांत्रिक मंत्र से भी जप कर सकते हैं।
व्रत और पूजन
शनिवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद एक साफ स्थान पर बैठें। आप चाहें तो मंदिर जाकर भी शनिदेव की पूजा कर सकते हैं। कई जगहों पर मान्यता है कि शनिदेव की मूर्ति घर में नहीं रखते हैं इसलिए मन ही मन शनिदेव का ध्यान करें। शनिदेव की पूजा के लिए सरसों तेल का दीया जलाएं और शनिदेव को नीले फूल अर्पित करें।
वस्तुओं का करें दान
शनि अमावस्या के दिन काले उड़द काले जूते, काले वस्त्र, तेल का दान और शनि महाराज की पूजा और दीपदान करना बहुत ही शुभ फलदायी कहा गया है। इससे शनि महाराज अपनी महादशा, अन्तर्दशा और गोचर के दौरान अधिक नहीं सताते हैं और परेशानियों का सामना करने की क्षमता भी देते हैं।
पितरों को करें प्रसन्न
दशरथ कृत शनि स्तोत्र का 11 बार पाठ करना उत्तम रहेगा। इस अवसर पर पितरों को भी प्रसन्न करके आप जीवन में आ रही बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। इसके लिए पीपल की पूजा करके पीपल के पत्तों पर 5 प्रकार की मिठाइयों को रखकर पितरों का ध्यान पूजन करें। पितरों को अर्पित किया गया प्रसाद घर नहीं लाएं, पूजन स्थल पर मौजूद लोगों में प्रसाद वितरण कर दें।
हनुमानजी की उपासना
महाबलि हनुमानजी की स्तुति से भी लाभ मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमानजी ने शनिदेव को लंकापति रावण की कैद से मुक्त कराया था। ऐसे में लगातार कैद में रहने से उन्हें काफी पीड़ा हो रही थी तो हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल का लेप लगाया, जिससे शनिदेव को काफी राहत मिली। इसलिए हनुमानजी की पूजा करने से शनि दोष से हो रही पीड़ा से भी शांति मिलती है। तभी से शनिवार के दिन तेल चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।
इसके साथ ही ऐसा माना जाता है कि हनुमानजी के भक्तों को शनिदेव की कुदृष्टि कभी नहीं झेलनी पड़ती है।


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