ईओडब्ल्यू में शिकायत के बाद दो विभागों के निर्देश भी बेअसर

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
भोपाल विकास प्राधिकरण में निर्माण संबंधित कार्यों के साथ खरीदी में हुए घोटाले का मामला ईओडब्ल्यू की जांच में है। ईओडब्ल्यू में शिकायत होने के बाद नगरीय प्रशासन व आवास विभाग ने मामला संज्ञान में लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन बीडीए ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस मामले में अब ईओडब्ल्यू कार्रवाई कर सकता है।
ईओडब्ल्यू कुछ माह पहले बीडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से दो जनरेटर खरीदी में लाखों की धांधली की शिकायत की गई थी। इस संबंध में ईओडब्ल्यू ने नगरीय प्रशासन व आवास विभाग को पत्र लिखकर आर्थिक अनियमितता की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इस पर नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने बीडीए को जनरेटर खरीदी में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में लेने और इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। ताकि जांच रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को सौंपी जाए, लेकिन अब तक इस मामले में बीडीए ने कोई कार्यवाही नहीं की है। ईओडब्ल्यू ने इस संबंध में जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए फिर विभाग को पत्र लिखा है। सूत्रों का कहना है कि अगर विभागीय स्तर पर कार्यवाही नहीं की जाती है तो ईओडब्ल्यू खुद जनरेटर खरीदी संबंधी दस्तावेज तलब कर आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल ईओडब्ल्यू के अफसर जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
अधिक दर पर टेंडर की हुई शिकायत
ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत में बताया गया है कि टेंडर अधिक दर पर ठेकेदारों को स्वीकृत किए गए हैं। जबकि अन्य संस्थाओं द्वारा कम दरों पर समान प्रकृति के कार्य कराए जा रहे हैं। इन्हीं संस्थाओं में शामिल विद्युत मंडल व हाउसिंग बोर्ड द्वारा कराए जा रहे कामों का विवरण भी दिया गया है। ईओडब्ल्यू ने नगरीय प्रशासन व आवास विभाग को नवंबर में पत्र लिखकर जांच कराने को कहा था। इस पर विभाग ने बीडीए को मामले पर संज्ञान लेने का निर्देश दिया। लेकिन बीडीए ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है।
यह था मामला
विद्युतीकरण के लिए बीडीए की तकनीकी शाखा द्वारा डीजल जनरेटर के लिए 49 लाख 42 हजार रुपए प्रति जनरेटर के हिसाब से दो जनरेटर खरीदे गए थे। इसमें सप्लाई, लगाने, ढुलाई जैसे खर्चों को भी जोड़ा गया। अनुबंध में शामिल नहीं होने के बावजूद 23.8 प्रतिशत अधिक स्वीकृत टेंडर रेट पर दो जनरेटर तय राशि 98 लाख 85 हजार 226 रुपए में खरीद कर करीब 23 लाख रुपए की अनियमितता की गई। अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से यह घोटाला किया गया है। गड़बड़ी के लिए अधिकारियों ने सीईओ के आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया। 6 अक्टूबर 2018 को बाह्य विद्युतीकरण संबंधित कार्यों के लिए सीईओ ने कार्यपालन यंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपने का आदेश जारी किया था। जब सीईओ के आदेश का पालन नहीं किया गया तब बीडीए की लेखा शाखा ने मामले पर आपत्ति ली थी। तब संबंधित अधिकारी ने तकनीकी मामला बताकर लिखा कि यह अधिकार क्षेत्र लेखा शाखा का नहीं बल्कि अधीक्षण यंत्री का है।


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