आवारा कुत्तों के आतंक पर मानव अधिकार आयोग सख्त

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
प्रदेश के विभिन्न शहरों, नगरों में आवारा कुत्तों के काटने के कारण हो रहीं दुर्घटनाओं को लेकर राज्य मानव अधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने ऐसे 23 मामलों को संज्ञान में लेते हुए राज्य शासन को पत्र लिखकर कुत्तों के आतंक को रोकने को इनके हमले में घायल हो रहे लोगों को उपचार के लिए प्रतिकर राशि देने के लिए तीन माह में कार्ययोजना बनाने की अनुशंसा की है।
इन मामलों में आयोग की पूर्ण पीठ ने सुनवाई करने के बाद मप्र शासन को पत्र लिखकर कुत्तों के आतंक से लोगों को बचाने और घायलों के उपचार के लिए राज्य शासन द्वारा तीन माह में कार्ययोजना बनाकर पीडि़तों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने को कहा है। मप्र शासन को आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली व्यक्तियों की मौत के संबंध में तीन माह में आवश्यक प्रतिकर योजना बनाए जाने की अनुशंसा की गई है, जिससे पीडि़त व्यक्ति को यथाशीघ्र प्रतिकर राशि शासन से प्राप्त हो सके। आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन द्वारा जब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाती है, तब तक आवारा कुत्तों के काटने से हुई दुर्घटना में पीडि़त व्यक्ति की मौत पर दुर्घटना दिनांक से दो माह में अंतरिम प्रतिकर राशि के रूप में दो लाख रुपये और घायलों के मामले में उनकी संख्या और गंभीरता की प्रकृति को देखते हुए जांच कर दस हजार से एक लाख रुपये तक की अंतरिम प्रतिकर राशि अदा किये जाने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही विभिन्न वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत अपेक्षा के अनुरूप मप्र शासन स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग आदि को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराते हुए ऐसे आवारा कुत्तों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इनमें कुत्ते पकडऩे के वाहन, कर्मचारियों की व्यवस्था, मोबाइल मेडिकल वैन, दुघर्टनाओं से पीडि़त व्यक्तियों के लिए नि:शुल्क इलाज, आवश्यक दवाइयों की प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र पर उपलब्धता आदि की अनुशंसा की गई है। आयोग ने तीन माह की समयावधि में राज्य शासन तथा संबंधित विभागों से अनुशंसा का पालन तीन माह में कर पालन प्रतिवेदन भेजने को कहा गया है।
सबसे ज्यादा घटनाएं भोपाल में
आयोग के पास आवारा कुत्तों के हमलों की 23 घटनाएं संज्ञान में हैं। इनमें सबसे ज्यादा करीब डेढ़ दर्जन घटनाएं भोपाल में घटित हुई हैं। हमलों में दो बच्चों की दर्दनाक मौत और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिला प्रशासन तथा नगर निगम द्वारा की जा रही कार्यवाही के बावजूद कुत्तों के हमलों की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।


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