कर्मचारियों को सिर्फ कमल नाथ पर भरोसा, नकुल को नहीं मिला साथ

चरण सिंह चौहान ॥ भोपाल
्रलोकसभा चुनाव के परिणाम प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को लेकर एक अलग ही संदेश दे रहे हैं। प्रदेश के सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री कमल नाथ पर तो अपना पूरा भरोसा जताया है, लेकिन उनके पुत्र नकुल नाथ और भोपाल से उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय समेत कांग्रेस के बाकी सभी प्रत्याशियों का साथ नहीं दिया।
इन नतीजों में सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि 16 साल पुराने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के कर्मचारी विरोधी फैसलों को लेकर दो-दो बार माफी मांगने वाले दिग्विजय सिंह को भोपाल से कर्मचारी मतदाताओं ने अब तक माफ नहीं किया है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट के उपचुनाव में जनता ने छिंदवाड़ा लोकसभा और विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को चुना है। आम मतदाताओं के जैसा ही रुख प्रदेश के उन कर्मचारियों ने भी दिखाया है, जो पांच माह पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गए थे। कर्मचारियों ने तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार की नीतियों पर भरोसा नहीं किया था। प्रमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी का खामियाजा शिवराज सरकार को भुगतना पड़ा था। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कर्मचारियों को साधने के जतन पर उनके ताबड़तोड़ तबादलों की मार पड़ गई है। राज्य में सत्ता परिवर्तन से खुश कर्मचारियों ने तबादलों के साथ ही उन्हें कसने की सरकार की कोशिशों के विरुद्ध अपना मत दिया है। इस विरोधी आंधी में यदि कोई बचा है तो वे अकेले नेता हैं मुख्यमंत्री कमल नाथ। छिंदवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में उन्हें 1951 पोस्टल बैलेट मिले हैं। उनके मुकाबले उतरे भाजपा के विवेक साहू को 726 डाक मतों से संतुष्ट होना पड़ा है। इसके उलट परिणाम कमल नाथ द्वारा खाली की गई छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर दिखा है। मुख्यमंत्री के पुत्र नकुल नाथ को भाजपा उम्मीदवार नत्थन शाह से कम डाक मत हासिल हुए हैं। यहां भाजपा को 924 और कांग्रेस को 754 पोस्टल बैलेट पड़े हैं।
1993 से 2003 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को सत्ता से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मचारी आज भी उनसे नाराज दिखाई दिए हैं। भोपाल से चुनाव लडऩे के दौरान दिग्विजय ने कर्मचारियों को मनाने के कई जतन किए। कर्मचारी संगठनों की बैठकें लीं। दो बार से ज्यादा वे राज्य मंत्रालय तक पहुंचे और कर्मचारियों के अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों के लिए माफी मांगी। दिग्विजय ने कर्मचारियों से उनका साथ देने का आग्रह भी किया था, लेकिन भरोसा दिलाने के बावजूद कर्मचारियों ने अपना रूख पोस्टल बैलेट से उजागर किया। दिग्विजय को महज 381 डाक मत मिले, जबकि भाजपा की प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर बिना कर्मचारियों के बीच गए 1270 वोट ले गईं। कर्मचारियों की बंपर नाराजगी यदि कहीं दिखी है तो भिंड संसदीय क्षेत्र में उजागर हुई है। यहां मुकाबला भाजपा की संध्या सुमन राय और कांग्रेस के देवाशीष जरारिया के बीच था। जरारिया को पिछले साल हुए दलित आंदोलन और उस दौरान इस अंचल में भड़की हिंसा से जोड़ कर देखा जा रहा था। आरोप हैं कि तब बहुजन समाज पार्टी में रहे दलित युवा चिंतक जरारिया ने उस आंदोलन को हवा दी थी, जिसकी प्रतिक्रिया में सवर्णों का आंदोलन हुआ था। यहां के सरकारी कर्मचारियों ने अपने मत से इसका हिसाब किया। भिंड में भाजपा को 4704 डाक मत हासिल हुए तो कांग्रेस को मात्र 632 वोट ही मिले। यही हाल प्रदेश के बाकी संसदीय क्षेत्रों का रहा है।
डाक मतपत्रों की स्थिति
लोकसभा क्षेत्र भाजपा कांग्रेस
बालाघाट 3243 1442
बैतूल 1011 205
भिंड 4704 632
भोपाल 1270 381
छिंदवाड़ा 924 754
दमोह 303 97
देवास 1721 423
धार 1122 431
गुना 3194 2395
ग्वालियर 2449 926
होशंगाबाद 1016 106
इंदौर 1745 547
जबलपुर 780 148
खजुराहो 725 227
खंडवा 940 805
खरगोन 1329 934
मंडला 1901 1220
मंदसौर 1842 524
मुरैना 3833 458
राजगढ़ 1599 645
रतलाम 1860 1058
रीवा 2976 419
सागर 893 354
शहडोल 1855 1091
सीधी 1130 536
टीकमगढ़ 1281 413
उज्जैन 1456 517
विदिशा 2579 1123
छिंदवाड़ा विस 726 1951


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