कुंवारी कन्या के रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देती हैं माता कुंवारी

समुद्र के किनारे बसा तटिय प्रदेश अपने खूबसूरत समुद्री किनारों और नारियल के पेड़ों के लिए तो जाना ही जाता है लेकिन तमिलनाडु का यह क्षेत्र एक और बात के लिए जाना जाता है जिसे कन्याकुमारी कहा जाता है। यहां एक ऐसा मंदिर हैं जहां प्रतिष्ठापित माता कुंवारी हैं। माता का कुंवारे रूप में पूजन किया जाता है। सागर के किनारे दाहिने क्षेत्र में यह मंदिर प्रतिष्ठापित है। जहां माता पार्वती प्राणप्रतिष्ठित हैं। मंदिर को कन्याकुमार अम्मन मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर तीनों समुद्रों के संगम पर बना है। माना जाता है कि महाभारत काल में बलराम और अर्जुन ने यहां दर्शन किए थे। मंदिर के गर्भगृह में माता की मनोहारी मूर्ति प्रतिष्ठापित है। दूसरी ओर मां के दाहिने हाथ में एक माला है और बायां हाथ जांघ से लगा हुआ है। यही नहीं माता की नाक का कांटा हीरे से सुसज्जित होता है। रोशनी पडऩे पर इसकी किरणें चैंधिया जाती हैं। माता की प्रतिमा पाषाण से बनी हुई है। प्रतिदिन उनका पूजन लग्न मुहूर्त में होता है। माता के मंदिर को लेकर कथा है कि माता ने रूप धरा था और वे भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। ऐसे में देवऋषी नारद ने प्रयास किया कि कैसे भी माता का विवाह शिव जी से न हो। रातभर माता शिव जी के इंतजार में खड़ी रहीं लेकिन जब वे नहीं लौटे और शुभ घड़ी बीत गई तो माता का विवाह उनसे नहीं हो पाया। जिसके चलते माता को कन्या कुमारी कहा गया। माता को प्राण प्रतिष्ठापित कर यहीं विराजित करवाया गया है।


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