नौरादेही के जंगलों में नैरोबी के चीते लाने की तैयारी

सच संवाददाता ॥ भोपाल
प्रदेश के नौरादेही के जंगलों में अब ईस्ट अफ्रीका के नैरोबी (केन्या) के चीतों की दहाड़ सुनाई देगी। पुनर्वास योजना के तहत नौरादेही जंगल क्षेत्र के वातावरण को अफ्रीका से आने वाले चीतों के लिए अनुकूल माना जा रहा है। भारत और अफ्रीका के बीच पुनर्वास को लेकर सहमति मिल चुकी है।
प्रक्रिया के तहत सब कुछ ठीक रहा तो प्रदेश के लिए यह बड़ी सौगात होगी और प्रदेश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानोंं की तरह नौरादेही भी पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान फिर स्थापित कर सकेगा। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में 6 चीतों को अफ्रीका के जंगल से नौरादेही लाकर छोड़ा जाएगा। जल्द ही इस दिशा में जरूरी कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इसके पहले भी देश में चीते की प्रजाति खत्म होने के बाद ईरान से चीता लाने के प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब साउथ अफ्रीका से भी चीता लाने के प्रस्ताव को खारिज किया गया था। एक्सपट्र्स ने सेंट्रल वाइल्ड लाइफ अथॅारिटी को रिपोर्ट देते हुए कहा कि देश में विलुुप्त हो चुके चीते की प्रजाति साउथ अफ्रीका के चीते से मैच नहीं होती है। यह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहा पाएगा।
ईरान से चीता लाने किए थे प्रयास
एक्सपट्र्स की रिपोर्ट के बाद प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य में चीता बसाने का प्रोजेक्ट टाल दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि साल 2004 में वाइल्ड लाइफ एक्सपट्र्स ने शोध करते हुए ईरान से चीता लाने के लिए प्रयास किए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान के चीते देश में विलुप्त हो चुके चीते के जेनेटिक से मैच होते हैं। एक्सपट्र्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान से चीता लाने के लिए बातचीत हुई। चीते की शर्त पर ईरान सरकार ने गुजरात के लॉयन की मांग की थी। गुजरात सरकार ने चीते की शर्त पर लॉयन देने से मना कर दिया। एक साल के प्रयास के बाद गुजरात सरकार लॉयन देने के लिए राजी हुई मगर उनकी भी शर्त थी कि गुजरात में भी चीता लाकर बसाया जाए। एक्सपट्र्स ने गुजरात में चीता बसाने के लिए नेचुरल सरवाइव टेस्ट किए मगर गुजरात में चीते के लिए बेहतर हैबिटेड नहीं था, जिसके बाद प्रदेश के नौरादेही को चुना गया। एक्सपट्र्स ने बताया था कि नौरादेही चीते के हैबिटेड के अनुसार है और यह क्षेत्र प्रजनन के लिए भी बेहतर साबित हो सकता है, लेकिन गुजरात सरकार ने ईरान को लॉयन देने से मना कर दिया। जिसके बाद साउथ अफ्रीका के चीते पर रिसर्च करने के बाद यहां से लाने के लिए चर्चा शुरू हुई। इसके लिए कई वाइल्ड लाइफ के जुड़े अधिकारियों ने साउथ अफ्रीका जाकर शोध भी किया। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि साउथ अफ्रीका से चीता अगर लाया जाता है तो जेनेटिकल मैचिंग के मुताबिक प्रजनन के लिए तैयार नहीं होगा। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों का मानना है कि साउथ अफ्रीका के चीते का जेनेटिक देश के विलुप्त हो चुके चीते से मैच नहीं हुआ है। अब ईस्ट अफ्रीका के चीतों पर शोध करने के बाद केन्या और नैरोबी से चीता लाया जाएगा, जिसके बाद ही नौरादेही में चीता बसाने का प्रोजेक्ट सफल होगा।


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