कमलनाथ ने संभाला कर्नाटक, एमपी में भी किलेबंदी

मुख्य प्रतिनिधि ॥ भोपाल
कर्नाटक में बनते बिगड़ते समीकरण को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने एक बार फिर अपने अनुभवी नेता मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथ में कमान सौंपी है। जिम्मेदारी मिलते ही सीएम नाथ कर्नाटक में मोर्चा संभालते हुए फ्लोर टेस्ट के जरिए सरकार गिराने की भाजपा के हथकंडे को नाकाम करने में सक्रिय हो गए हैं। भाजपा ने कल फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। वहीं गोवा और कर्नाटक एपिसोड को देखते हुए मुख्यमंत्री नाथ ने मध्यप्रदेश में भी किलेबंदी शुरू कर दी है। अपने सभी विधायकों को ताकीद करने दस दिन में दूसरी बार 17 जुलाई को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। साथ ही अनुदान कटौती की मांगों पर चर्चा के दौरान सबकी मौजूदगी अनिवार्य करने व्हिप भी जारी किया गया है। बागियों के इस्तीफों और लगातार बदल रहे राजनीतिक माहौल में अपनी पार्टी की सरकार बचाने कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री नाथ की अगुवाई में अपने तीन दिग्गजों को कर्नाटक भेजा है। श्री नाथ के साथ कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद और केसी वेणुगोपाल कल रात बेंगलुरू पहुंच भी गए हैं। वहां वे कांग्रेस और जेडीएस विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। इसके अलावा बागी विधायकों पर भी नजर रखकर नाथ अपनी पार्टी की सरकार पर संकट टालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

हर संकट में आगे आए नाथ
पार्टी पर आए लगभग हर संकट को दूर करने में कांग्रेस हाईकमान के लिए मुख्यमंत्री नाथ हमेशा से ही आगे आते रहे हैं। पार्टी को संकट से निकालना उनकी पहचान भी रही है। पिछले दिनों लोकसभा चुनाव के पहले भी सभी राज्यों के दिग्गज नेताओं से समन्वय बनाने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई थी। वहीं चुनावों के बाद अन्य दलों से गठबंधन की संभावना तलाशने की जिम्मेदारी भी नाथ को ही हाईकमान ने सौंपी थी। हार के बाद पार्टी में गहराए सन्नाटे को तोडऩे में भी सीएम नाथ ने सक्रियता दिखाई थी। मध्यप्रदेश में भी आपसी तालमेल बढ़ाकर वे सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाने में कामयाब रहे हैं।

प्रदेश में भी भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरने की तैयारी
गोवा और कर्नाटक में भाजपा के मंसूबे देखते हुए मुख्यमंत्री नाथ ने मध्यप्रदेश में भी सक्रियता बरतते हुए किलेबंदी शुरू कर दी है। साथ ही मानसून सत्र के दौरान सदन में भाजपा द्वारा फ्लोर टेस्ट की कोशिश को नाकाम करने के लिए मुख्यमंत्री नाथ दिल्ली के लिए रवाना होने के पहले ही जमावट कर गए। अव्वल तो उन्होंने सदन में अनुदान कटौती के प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और समर्थन देने वाले सभी विधायकों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिपजारी कराया है। साथ ही 17 जुलाई को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक मुख्यमंत्री के निवास में होगी। अचानक विधायक दल की बैठक बुलाए जाने को गोवा और कर्नाटक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार विपक्ष को किसी तरह का मौका नहीं देना चाहती है इसलिए अपने विधायकों से सदन में मौजूद रहने की बात कही गई है। भाजपा बजट पारित कराने के लिए मतदान की मांग कर सकती है, जिसमें फ्लोर टेस्ट की स्थिति बन सकती है। सीएम ने सदन में सभी विधायकों को मौजूद रहने का व्हिप भी जारी किया है। ताकि मतदान की स्थिति में सरकार को कोई अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े।


facebook - जनसम्पर्क
facebook - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
twitter - जनसम्पर्क
twitter - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
जिला प्रशासन इंदौर और शासन की दैनंदिन गतिविधियों और अपडेट के लिए फ़ॉलो करें