भगवान विष्णु धर्म को बहाल करने और लोगों के कल्याण के लिए पृथ्वी पर लेते हैं जन्म

भागवत पुराण में, यह उल्लेख किया गया है कि जब भी बुराई की अच्छाई पर विजय होने लगती है, अंधेरा प्रकाश पर हावी होने लगता है, और अन्याय व अत्याचार बडऩे लगते है। तब भगवान विष्णु धर्म को बहाल करने और सही रास्ते में लोगों को मार्गदर्शन करने के लिए पृथ्वी पर पुनर्जन्म लेते है। कुल मिलाकर, भगवान विष्णु ने 23 बार पुनर्जन्म लिया है। और हर बार वह एक अलग रूप में रहा है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु कलयुग के अंत में एक आखरी बार फिर से जन्म लेंगे जो कि उनका 24वां और आखिरी अवतार होगा।
1. आदि पुरुष: आदि पुरुष भगवान विष्णु का सबसे पहला अवतार था। यही अवतार श्री नारायण के नाम से भी जाना जाता है। इस अवतार में भगवान विष्णु समुद्र के भीतर शेषनाग के ऊपर विश्राम करते हुए दिखाए जाते हैं। भगवान नारायण ही सारी दुनिया के रचयिता है। उनकी नाभि में से उस कमल का आगमन हुआ था जहां ब्रह्मा जी निवास करते हैं।
2. चार कुमार: चार कुमार ब्रह्मा जी द्वारा बनाए गए पहले प्राणी थे। जिनका नाम सनका, सनातन, सनन्दना और सनत कुमार था। यह अवतार छोटे शिशुओं की तरह दिखाई देता है। इन चारों का उद्देश्य जीवन के निर्माण में ब्रह्माजी की सहायता करना था।
3. नारद: ऋषि का रूप लिए हाथ में तंबूरा पकड़े नारद मुनि का अवतार भी भगवान विष्णु के अवतारों में से एक है। नारद जी के पास क्षणों में एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करने की विशेष क्षमता है। उन्हें कहानीकार, संगीतकार और संदेश वाहक के रूप में जाना जाता है।
4. नर नारायण: नर और नारायण भगवान विष्णु के जुड़वा ऋषि अवतार है। उनका जन्म धरती पर सत्य, न्याय, धार्मिकता और धर्म के अन्य तत्वों की स्थापना करने के लिए हुआ था। वह दोनों भाई इतने शक्तिशाली थे कि वह अपने ध्यान के माध्यम से भगवान शिव के विनाशकारी हथियार पाशुपतास्त्र को सशक्त करने में सक्षम थे।
5. कपिल: कपिल ऋषि महाभारत में वर्णित एक वैदिक ऋषि हैं। कहां जाता है कि उन्होंने संख्या स्कूल ऑफ हिंदू फिलॉस्फी की स्थापना की है। संख्या ज्ञान को प्राप्त करने का एक सूत्र है।
6. दत्तात्रेय: दत्तात्रेय को त्रिमूर्ति के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऋषि हैं और योग के स्वामी हैं। इन्हें तीन सिर के साथ संत के रुप में दर्शाया जाता है। वह हिंदू धर्म के तीनों देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिनके तीन सिर के साथ 6 हाथ हैं
7. यज्ञ: इसे यागेश्वार के रूप में भी जाना जाता है। यह एक अनुष्ठान है जिसे देवताओं को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। कुछ ग्रंथों के अनुसार देवताओं के राजा इंद्र को भी यज्ञ के रूप में जाना जाता है
8. ऋषभ: ऋषभ एक उपदेशक और आध्यात्मिक गुरु थे। जिन्हें जैन धर्म के संस्थापक के रूप में भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि वह जन्म और मृत्यु के चक्र से बच निकले थे, और उन्होंने लोगों का मोक्ष के मार्ग पर मार्गदर्शन किया।
9. आदिराज पृथु : भगवान विष्णु के एक अवतार का नाम आदिराज पृथु है। वह धरती पर हरियाली के जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपना जीवन भगवान की सेवा में समर्पित कर दिया और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
10. भगवान धन्वन्तरि : समुंद्र मंथन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत का कलश लिए प्रकट हुए थे। इन्हीं धन्वन्तरि को विष्णु जी का अवतार माना जाता है, कहा जाता है कि यह आयुर्वेद के देवता हैं।
11. मोहिनी: यह विष्णु जी का नारी अवतार है। समुंद्र मंथन के समय जब अमृत कलश की उत्पत्ति हुई तो असुर अमृत कलश को लेकर भाग निकले, ऐसे में भगवान विष्णु ने मोहिनी का अवतार लिया और बड़ी ही चतुराई के साथ अमृत को देवताओं में वितरित कर दिया। उसी समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु के सिर को काट दिया था। जो आज ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु के रूप में दो ग्रहों के नाम से प्रसिद्ध है।
12. हयग्रीव अवतार: इन्हें ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है। जिन्हें घोड़े के सिर के साथ एक आदमी के शरीर वाला दर्शाया जाता है। मधु और कैटभ नाम के दो राक्षसों ने ब्रह्मा जी के वेदों का हरण कर लिया था। तब भगवान विष्णु के अवतार हयग्रीव नेमधु और कैटभ का वध कर वेद व पुराण ब्रह्मा जी को दे दिए।
13. महर्षि व्यास : इन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है। वेदव्यास जी चिरंजीवी हैं इन्होंने बहुत से वेदों की संरचना की, महर्षि वेदव्यास ने ही महाभारत ग्रंथ की रचना की थी।
14. मत्स्य अवतार : सृष्टि को परलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु जी ने मत्स्य अवतार लिया था। जो कि आधा मछली और आधा मानव के रूप में दर्शाया जाता है। भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने मनु की वेदों, पौधों के बीजों व प्राणियों को बचाने में मदद की थी।
15. कूर्म अवतार: पुराने ग्रंथों के मुताबिक भगवान विष्णु जी ने कछुए का अवतार लेकर समुंद्र मंथन में सहायता की थी। भगवान विष्णु जी का यह अवतार अपनी पीठ पर संपूर्ण ब्रह्मांड का वजन उठाने में सक्षम है।
16. वराह अवतार : वराह अवतार भगवान विष्णु जी का दूसरा अवतार माना जाता है। हिंदू ग्रंथों के मुताबिक उन्होंने धरती को बचाने के लिए राक्षस हिरण्याक्ष का वध किया था। जो की धरती को समुंदर तल में ले गया था।
17. नरसिंह : नरसिंह भगवान विष्णु का आधा शेर और आधा मानव अवतार है। जिनका जन्म राजा हिरण्यकशिपु के शासनकाल को समाप्त करने के लिए हुआ था। राजा हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान से भी अधिक बलशाली मानता था। उसे ना तो कोई देवता, ना पक्षी, ना पशु, ना मनुष्य, ना दिन में, ना रात में, ना धरती पर, ना आकाश में, ना अस्त से, ना शास्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था।
18. वामन : देत्यो के राजा बलि ने पूरे स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था। महाबली कि इस बढ़ती हुई शक्ति को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने वामन नाम के ब्राह्मण का अवतार लिया था। जो की कद्द में बोन थे।
19. परशुराम : परशुराम जी एक क्षत्रिय ब्राह्मण है। जिन्हें ऋषि के रूप में एक हाथ में कुल्हाड़ी लिए दर्शाया जाता है। उनका जन्म बुरे क्षत्रियों के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए हुआ था। जो कि अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर निर्दोषों पर अत्याचार व उनके साथ अन्याय कर रहे थे।
20. श्री राम : श्री राम शक्तिशाली देवताओं में से एक हैं। और महाकाव्य रामायण के मुख्य चरित्र है। त्रेता युग में राक्षसराज रावण का आतंक बढ़ता जा रहा था। जिसे देवता भी भयभीत थे, राजा राम आतंकी रावण के शासन को समाप्त और अपनी पत्नी सीता को मुक्त करने के लिए रावण का वध करते हैं, और धरती पर धर्म व न्याय की स्थापना करते हैं।
21. श्री हरि अवतार: प्राचीन ग्रंथों के अनुसार गजेंद्र अपनी पत्नियों के साथ तालाब में स्नान करने गया। वहां उसका एक विशाल मगरमच्छ के साथ युद्ध हो गया। यह युद्ध संघर्ष 1000 साल तक चलता रहा। तब गजेंद्र ने भगवान विष्णु का ध्यान किया और भगवान विष्णु श्री हरि के अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध किया और गजेंद्र का उद्धार किया।
22. श्री कृष्ण अवतार : श्री कृष्ण भगवान विष्णु जी के बड़े रूपों में से एक रुप है। उनका जन्म अपने अत्याचारी मामा कंस का शासन समाप्त करने के लिए हुआ था। महाभारत में भी श्री कृष्ण जी की विशेष भूमिका थी।
23. बुद्ध अवतार : सिद्धार्थ गौतम जी को आज गौतम बुद्ध के नाम से जाना जाता है। ज्ञान की प्राप्ति के लिए उन्होंने अपना परिवार और सभी तरह के भौतिक अधिकार व सुख सुविधाएं छोड़ दी थी। उन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की और लोगों का मार्गदर्शन किया।
24. कल्कि अवतार: कल्कि भगवान विष्णु जी का एकमात्र ऐसा अवतार है जिसका अभी तक जन्म नहीं हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि वह एक नए सत्य युग या कालकी युग की शुरुआत करेंगे और समस्त धरती से बुराई का खात्मा कर देंगे। कल्कि को एक सफेद घोड़े की सवारी करते और हाथ में चमकदार तलवार लिए योद्धा के रुप में दर्शाया जाता है। समय वा रूप में अंतर होने के बावजूद उनके सभी अवतारों में एक समानता थी। उन सभी अवतारों का लक्ष्य बुराइयों को समाप्त करने और धर्म को फिर से स्थापित करने का था। यही कारण है कि भगवान विष्णु को ब्रह्मांड के संरक्षक के रूप में जाना जाता है।


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