संतान सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है पुत्रदा एकादशी का व्रत

विवाह के बाद सभी लोगों की इच्छा रहती है एक सुंदर संतान की। लेकिन कुछ लोगों को संतान सुख मिलने में बाधा आने लगती है और उन्हें दाम्पत्य जीवन में निराशा होने लगती है। पद्म पुराण में संतान की चाहत रखने वालों के लिए सावन महीने की एकादशी के व्रत का उल्लेख किया गया है। इस साल यह एकादशी आज 11 अगस्त रविवार को है। संतान सुख और संतान को दीर्घायु प्रदान करने वाली इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
धार्मिक महत्व
शास्त्रों में बताया गया है कि जोड़े से इस एकादशी का व्रत करने से पुत्र की दीर्घायु प्राप्त होती है और जो दंपती संतान सुख से वंचित हैं, उनके आंगन में भी किलकारी गूंजने लगती है। यह एकादशी सभी पापों को नाश करने वाली होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी की कथा पढऩे और सुनने से कई गायों के दान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस व्रत में आप भगवान विष्णु और पीपल की पूजा करने का शास्त्रों में विधान है। जो भी जातक पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है, उसे सदाचार का पालन करना होता है। इस व्रत में वैष्णव धर्म का पालन करना होता है। इस दिन प्याज, बैंगन, पान-सुपारी, लहसुन, मांस-मदिरा आदि चीजों से दूर रहना चाहिए। दशमी तिथि से पति-पत्नी को भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और मूली, मसूर दाल से परहेज रखना चाहिए। व्रत में नमक से दूर रहना चाहिए। साथ ही कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। पति-पत्नी दोनों सुबह स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। घर या मंदिर में भगवान का एक साथ पूजन करें। पूजन के दौरान सबसे पहले भगवान के विग्रह को गंगाजल से स्नान कराएं या उस पर गंगाजल के छींटे दें, साथ ही पवित्रीकरण का मंत्र बोलते हुए खुद पर भी गंगाजल छिड़कें। इसके बाद दीप-धूप जलाएं और भगवान को टीका लगाते हुए अक्षत अर्पित करें। फिर भोग लगाएं। व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु-लक्ष्मीजी की आरती करें। पुत्र प्राप्ति के लिए गरीबों में दान जरूर करें।


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