15 साल बाद गुजरात से अपना हक मांगने की तैयारी में प्रदेश

प्रशासनिक संवाददाता ॥ भोपाल
प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर गुजरात सरकार की मनमानी को रोकने और राज्य के हितों के लिए मप्र सरकार गुजरात सरकार से दो-दो हाथ करने की तैयारी में है। पिछले 15 सालों में सरदार सरोवर बांध से जुड़े मप्र के हितों की गुजरात सरकार द्वारा लगातार अनदेखी के बाद भी मप्र सरकार खामोश रही। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रदेश कांग्रेस सरकार अब गुजरात सरकार से अपने हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने जा रही है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ऐसे सभी मुद्दों को चिन्हित कर रहा है। हाल ही में राज्य सरकार ने बांध से बनने वाली बिजली में अपनी हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया है। नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध बनने वाली 21 हजार मेगावाट में से करीब 1450 मेगावाट बिजली मध्यप्रदेश मिलनी थी। इस 56 फीसदी बिजली के लिए 192 गांव व एक नगर डूबाए गए हैं लेकिन अब तक मप्र को इससे एक यूनिट बिजली भी नहीं मिली है। हाल ही में मप्र सरकार ने गुजरात सरकार से बिजली की मांग की है। 1972 में नर्मदा नदी पर 30 बड़े बांध मध्यप्रदेश में बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब तक 5 बांध बरगी, इंदिरा सागर, महेश्वर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर बांध ही बन पाए। नर्मदा नदी व 45 सहायक नदियों पर 135 मझले और 3 हजार छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। नर्मदा न्यायिक प्राधिकरण द्वारा मप्र को 18.25 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) नर्मदा कछार जल का बंटवारा किया था। प्रदेश द्वारा अपने हिस्से का पानी उपयोग के अनुसार 29 बांधों की योजना बनाई गई।


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