20 हजार वनकर्मियों को 13 माह के वेतन की दरकार

सच संवाददाता ॥ भोपाल
वनकर्मियों को पुुलिस के सामान वेतन देने के मामले में सरकार की ओर से सहमति बन चुकी है। इस प्रस्ताव को वित्तीय आकलन के लिए फाइनेंस को भेजा गया है। अब फाइनेंस ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है। प्राथमिक रूप से विश्लेषण के बाद वित्तीय बोझ बढऩे का हवाला देकर 13 माह के वेतन पर असमंजस की स्थिति बन गई है। गौरतलब है कि सरकार ने अपने वचन-पत्र में वादा किया था कि वनकर्मियों को पुलिस के सामान वेतन मिलेगा।
वन कर्मचारियों की सालों पुरानी पुलिस के सामान वेतन देने की मांग को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने वादा तो कर दिया है मगर इस वादे पर फाइनेंस ने आपत्ति जताई है। इसके चलते प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं भेजा गया है। दरअसल, राज्य सरकार ने वनकर्मियों को पुलिस आरक्षकों के समान 13 माह का वेतन देने का वादा किया था। वन विभाग की ओर से शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन गई थी। इसका फायदा 20, 670 वन कर्मचारियों को मिलना था मगर फाइनेंस की ओर से हरी झंडी नहीं मिली है। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव को लेकर कहा था किइससे सरकार पर मासिक 75 करोड़ 63 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। गौरतलब है कि प्रदेश के वन कर्मचारी लंबे समय से पुलिस के समान 13 माह के वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पुलिस के समान वे भी पूरे समय फील्ड में रहते हैं। उन्हें छुट्टियां भी नहीं मिलतीं, ऐसे में उन्हें भी एक माह का अतिरिक्त वेतन दिया जाना चाहिए। इसे लेकर वनकर्मी पिछले साल 14 दिन हड़ताल पर रहे थे। तब संरक्षित क्षेत्रों से लेकर सामान्य वनमंडलों में व्यवस्था चरमरा गई थी। तब शिवराज सरकार ने ग्रेड-पे से जुड़ीं मांगें पूरी की थीं। जबकि कांग्रेस ने सरकार बनने पर 13 माह का वेतन देने का वादा किया था। कांग्रेस ने इसे अपने वचन-पत्र में भी शामिल किया था। इस वचन को पूरा करने पर अब सरकार बैकफुट पर खड़ी नजर आ रही है।
आदेश जारी होने के बाद ही हो लागू
वनकर्मियों को 13 माह के वेतन की दरकार है। इस बीच चर्चा भी है कि यदि सरकार पूर्व अप्रैल या जुलाई से डीए देने के आदेश जारी करती है तो उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि इन दिनों कोई भी भुगतान कराने के लिए ट्रेजरी को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। तभी एरियर मिलता है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार जब आदेश करे तो वर्तमान माह से ही आदेश जारी करे। इससे ही उन्हें फायदा मिलेगा।
एपीसीसीएफ छुट्टी पर गए
इस पूरे मामले पर नियमों को ध्यान में रखते हुए 13 माह वेतन देने का प्रस्ताव तैयार करने वाले अफसर ृछुट्टी पर हैं। उन्हें बीते दिन हुई कैबिनेट में प्रस्ताव भेजना था लेकिन एपीसीसीएफ धर्मेंद्र वर्मा खुद ही निजी कार्यों का हवाला देकर छुट्टी पर चले गए हैं। सूत्रों का कहना है इस मामले में उन्हें फाइनेंस विभाग से लगातार इस प्रस्ताव को लेकर मॉनिटर करना था मगर छुट्टी के चलते प्रस्ताव पर क्या अपडेट है। इसकी जानकारी पीसीसीएफ के पास भी नहीं है।
इतने कर्मचारियों को मिलना है फायदा
पदनाम संख्या वर्तमान में कार्यरत
वनरक्षक 14,024 12,592
वनपाल 4,194 3,101
उप वनक्षेत्रपाल 1,258 773
वनक्षेत्रपाल 1,194 576
योग 20,670 17042
हमने इस मामले पर फाइनेंस को प्रस्ताव भेजा है। किसी कारणवश गत दिवस हुई कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं रखा गया। आगामी दिनों में विभागों की सहमति के बाद आदेश जारी हो जाएगा।
उमंग सिंगार, वनमंत्री
वनमंत्री ने वादा किया था कि 25 सितंबर को कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा लेकिन इस प्रस्ताव को कैबिनेट के एजेंडों में शामिल नहीं किया गया है। इस मामले में वित्त विभाग से अनुमति के लिए वनमंत्री को दखल देना चाहिए।
आमोद तिवारी, प्रातांध्यक्ष,म प्र वनकर्मचारी संघ


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