कायम हैं MP कांग्रेस की उम्मीदें, ट्वीट किया- 15 अगस्त को बतौर मुख्यमंंत्री तिरंगा फहराएंगे कमलनाथ

भोपाल: मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार सत्ता से बेदखल हो चुकी है, बीजेपी सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयार है. लेकिन कांग्रेस की उम्मीदें अब भी बरकरार हैं और ये उम्मीदें ट्वीट के जरिए सामने आई है. मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट कर बड़ा दावा किया है. कांग्रेस ने लिखा कि 15 अगस्त 2020 को कमलनाथ एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर ध्वजारोहण करेंगे और परेड की सलामी लेंगे. ये बेहद अल्प विश्राम है. इतना ही नहीं कांग्रेस ने ये भी लिखा है कि इस ट्वीट को संभाल कर रखना.

MP Congress

@INCMP
इस ट्वीट को सँभाल कर रखना-

15 अगस्त 2020 को कमलनाथ जी मप्र के मुख्यमंत्री के तौर पर ध्वजारोहण करेंगे और परेड की सलामी लेंगे।

ये बेहद अल्प विश्राम है।

17 दिनों के सियासी ड्रामे के बाद कमलनाथ का इस्तीफा
मध्य प्रदेश में 17 दिनों तक चले सियासी ड्रामे के बाद शुक्रवार को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राज्यपाल लालजी टंडन को लिखे त्यागपत्र में कमलनाथ ने लिखा, ‘मैंने अपने 40 साल के सार्वजनिक जीवन में हमेशा से शुचिता की राजनीति की है और प्रजातांत्रिक मूल्यों को सदैव तरजीह दिया है. मध्य प्रदेश में पिछले दो हफ्ते में जो कुछ भी हुआ, वह प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय है.’

कमलनाथ ने 17 दिसंबर 2018 को ली थी शपथ
कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर एक साल तीन महीने और चार दिन तक काम किया. कमलनाथ ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 230 में 114 सीटें मिली थीं. सपा के 2, बसपा का 1 और निर्दलीय 4 विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन किया था. जबकि बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं.

सिंधिया के इस्तीफा के बाद शुरू हुई थी सियासी महाभारत
10 मार्च को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी लग गई. 22 विधायकों ने भी हाथ का साथ छोड़ दिया. इस्तीफों के दौर के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी. जिसके बाद बीजेपी लगातार फ्लोर टेस्ट की मांग कर रही थी. बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जल्द फ्लोर टेस्ट की मांग की थी. दो दिन चली सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कमलनाथ को 20 मार्च शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था. लेकिन उससे पहले ही कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया.


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