घोटाला हो जाए तो भी नहीं डूबेंगे पैसे, को-ऑपरेटिव बैंक खाताधारकों के लिए अच्छी खबर

नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों के भीतर बैंक घोटालों (Bank Frauds) के मामलों की खबरें आती रही हैं. इस वजह से खाताधारकों में बैंकों को लेकर अविश्वास बढ़ा है. सरकारी और निजी बैंक में जमा पैसे तो फिर भी बचने की उम्मीद रहती है. लेकिन को-ऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों को हमेशा उनके पैसे डूबने का डर सताता रहा है. इस बीच केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसके लागू होते ही को-ऑपरेटिव बैंक (Co-operative banks) खाताधारकों के पैसे आसानी से नहीं डूबेंगे.

को-ऑपरेटिव बैंकों की निगरानी अब रिजर्व बैक के जिम्मे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने बुधवार को सभी को-ऑपरेटिव बैंकों की देखरेख का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को सौंप दिया है. इस कदम का मकसद देश में पीएमसी बैंक (PMC Bank) जैसे घाटोले रोकना और सहकारी बैंकों के ग्राहकों को भरोसा देना है. इस बाबत राष्ट्रपति जल्द एक अध्यादेश जारी करेंगे.

नहीं होंगे अनियमतताएं
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार के इस फैसले को एतिहासिक बताते हुये कहा कि देश के 1,540 शहरी सहकारी बैंक और बहु- राज्यीय सहकारी बैंक अब रिजर्व बैंक की निरीक्षण प्रक्रिया के तहत आ जायेंगे. यह प्रक्रिया अब तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के मामले में ही अपनाई जाती रही है.जावड़ेकर ने कहा, ‘इस फैसले से सहकारी बैंकों के जमाकर्ताओं को भरोसा होग कि उनका पैसा सुरक्षित है.’

देश में कुल मिलाकर 1,482 शहरी सहकारी बैंक और 58 के करीब बहु- राज्यीय सहकारी बैंक है जिनसे 8.6 करोड़ ग्राहक जुड़े हुये हैं. इन बैंकों में करीब 4.85 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जमा है.

सरकार का यह कदम इस लिहाज से काफी अहम है कि पिछले कुछ समय में कई सहकारी बैंकों में घोटाले सामने आये हैं और इससे बैंक के जमाकर्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है. पंजाब एण्ड महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी बैंक) घोटोले का मामला हाल में काफी चर्चा में रहा. घोटाला सामने आने के बाद बैंक के कामकाज पर रोक लग जाने से ग्राहकों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. (भाषा इनपुट)


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