करोड़ों के कबाड़, नीलामी का इंतजार

महापौर के निर्देश पर भी नहीं हुई कार्रवाई
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
नगर निगम के स्टोर में कबाड़ सड़ रहा है। कबाड़ को बेचने के लिए नगर निगम परिषद ने पार्षदों की एक समिति का गठन किया था, लेकिन समिति कबाड़ को बेचने के लिए नीति तैयार नहीं कर सकी। एक अनुमान के मुताबिक नगर निगम के चारों भण्डार ग्रहों में करोड़ों रुपए का कबाड़ पड़ा हुआ है। यह कबाड़ पिछले पांच साल से अधिक समय से यहां पड़ा हुआ है, जिसे नीलाम करने की निगम प्रशासन ने कोशिश ही नहीं की गई।
नगर निगम का अतिक्रमण अमला अवैध निर्माण व बिना अनुमति के गुमठियों को यहां-वहां रखने पर अवैध निर्माण की सामग्री व गुमठियों को उठाकर नगर निगम के स्टोर में जमा कर देता है। इतना ही नहीं संपत्ति विरूपण की कार्रवाई के दौरान जब्त होने वाली सामग्री भी स्टोर में जमा की जाती है। नगर निगम के अतिक्रमण अमले द्वारा जब्त की जाने वाली सामग्री में ज्यादातर लोहे का सामान होता है और कुछ प्लास्टिक का सामान होता है। लोहे का सामान खुले में पड़ा होने के कारण जल्दी सड़ जाता है। नगर निगम प्रशासन ने शहर में चार स्थानों पर अतिक्रमण व जब्ती कार्रवाई के दौरान जब्त किए जाने वाले सामान के भण्डारण हेतु भण्डार घर तैयार किए है। एमपी नगर में पुराने एमपी नगर थाने के पास, भानपुरा खंती, पुल बोगदा और काजीकेम्प में यह भण्डार घर है। सबसे अधिक कबाड़ का सामान एमपी नगर स्थित भण्डार घर में है, जहां एक करोड़ रुपए से अधिक का कबाड़ वर्षों से सड़ रहा है। पुल बोगदा स्थित भण्डार घर में भी 50 लाख से अधिक का कबाड़ पड़ा हुआ है और इतनी ही राशि का कबाड़ भानपुरा खंती में भी पड़ा हुआ है। कबाड़ में सबसे अधिक लोहा है, जिसमें ज्यादातर रोजमर्रा के काम में आने वाली सामग्री है, जिसे निगम के अमले ने अवैध रूप में यहां-वहां उपयोग किए जाने पर अतिक्रमणकारियों के पास से जब्त की है। नगर निगम का अमला रोजाना ही अतिक्रमण हटाने तथा संपत्ति विरूपण की कार्रवाई कर हजारों रुपए का सामान जब्त करता है। कुछ सामान तो लोग जुर्माना राशि चुकाकर वापस ले जाते है, परन्तु ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर पाते है और सामग्री नगर निगम के भण्डार घर में पड़े-पड़े सड़ जाती है। कबाड़ में लोहे के सरिये, एंगल, हाथठेले, स्टैंड, लोहे की चादर, बोर्ड, तार, गुमठियां, टेबिल-कुर्सी, लोहे के दरवाजे, पाइप और तमाम तरह का वह सामन जो जो आम आदमी के उपयोग का है। नगर निगम सूत्रों की मानें तो पांच साल पहले कबाड़ को बेचा गया था, इसके बाद से कभी कबाड़ को बेचने की पहल नहीं हुई। अप्रैल 2013 को नगर निगम की बजट बैठक में निगम प्रशासन द्वारा कचरे के सड़े कंटेनर व स्क्रेब को बेचने की अनुमति परिषद से मांगने का प्रस्ताव शामिल किया गया था। इस प्रस्ताव को मंजूर किए जाने के बाद विपक्ष के पार्षदों ने नगर निगम के स्टोर में भी करोड़ों रुपए का कबाड़ सडऩे की बात कही थी, तब परिषद अध्यक्ष ने एक समिति का गठन किया था, जो भण्डार घरों में पड़ी सामग्री को बेचने की प्रक्रिया तय करने के साथ-साथ इस सामग्री की अनुमानित राशि तय करने का जिम्मा सौंपा गया था। इस समिति ने निगम प्रशासन को अपनी रिपोर्ट अभी नहीं सौंपी है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद परिषद में भेजी जाएगी, जहां रिपोर्ट के आधार पर परिषद द्वारा लिए जाने वो निर्णय के बाद कोई प्रक्रिया तय होगी और तब कबाड़ के नीलामी की जाएगी।
एमपी नगर में आधी सड़क पर कबाड़
एमपी नगर थाने के पीछे नगर निगम का स्टोर लबालब भरा है। यहां तक की कबाउ़ का सामान सड़क तक फैला हुआ है। नगर निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण कबाड़ वाले स्टोर से कबाड़ की नीलामी नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि निगम प्रशासन को यह निर्णय करना है कि कब और कैसे, कबाड़ की नीलामी होना है।
कबाड़ को बेचने के निदेश दिए है। किस स्टोर में कितना कबाड़ है और उसकी अनुमानित कीमत कितनी होगी, इसका आकलन किया जा रहा है, इसके बाद कबाड़ को बेच दिया जाएगा। ताकि स्टोर रूम खाली हो सके।
> आलोक शर्मा, महापौर


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