मुख्यमंत्री के दखल के बाद भी माशिमं ने नहीं बांटी अंकसूची

दो साल बाद भी विद्यार्थियों को नहीं दी रेगुलर की मार्कशीट
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
शासन के निर्देशों को माध्यमिक शिक्षा मंडल कितने महत्व देता है, इसका जीता जागता उदाहरण वह छात्र है, जिन्होंने रेगुलर विद्यार्थियों के रूप परीक्षा फार्म भरा था, लेकिन स्कूलों की मान्यता समाप्त होने के कारण प्रायवेट विद्यार्थियों के रूप में परीक्षा देना पड़ी थी। इस मामले को लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से न्याय की अपील की थी। पूरा मामला सुनने के बाद शासन ने मंडल को छात्रों को रेगुलर छात्रों की अंकसूची देने के निर्देश दिए थे, लेकिन दो साल बाद भी छात्र रेगुलर अंकसूची के लिए मंडल के चक्कर काट रहे हैं।
मंडल ने इन छात्रों की पुरानी अंकसूची (प्रायवेट) भी जमा करा ली है, ऐसे में इन छात्रों को भविष्य अधर में है। लोक शिक्षण संचालनालय के तत्कालीन आयुक्त डीडी अग्रवाल ने अक्टूबर-15 में 108 हाईस्कूल की मान्यता निरस्त कर दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि संचालनालय को सशर्त मान्यता देने का अधिकार नहीं है, जबकि एक साल पहले इन स्कूलों को सशर्त मान्यता दी गई थी।
ऐसे ही मापदंडों का पालन न करने पर 253 हायर सेकंडरी स्कूलों की मान्यता भी निरस्त की गई थी। ये कार्रवाई होने से पहले विद्यार्थी नियमित परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा फार्म जमा कर चुके थे।
स्कूल संचालक और विद्यार्थी इस कार्रवाई के खिलाफ पूर्व विभागीय मंत्री पारसचंद्र जैन और राज्यमंत्री दीपक जोशी से कई बार मिले थे। फिर भी मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी छात्रों को प्राइवेट करने का निर्णय ले लिया और उन्हें प्राइवेट छात्र के रूप में ही परीक्षा दिलाई। इस बीच मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। मंत्री पारसचंद्र जैन ने विभागीय अधिकारियों की बैठक बुलाई और पूरे मामले को सुना। इसके बाद छात्रों को नियमित परीक्षार्थी मानकर मार्कशीट जारी करने का निर्णय लिया गया।इसके बाबजूद मंडल ने अब तक तक कई छात्रों को रेगुलर अंकसूची नहीं दी है। मामले के लेकर स्कूल संचालक व अभिभावक लोक शिक्षण संचालनाय एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल के चक्कार काट रहे हैं। हालही में गुना जिले शिवशक्ति स्कूल, स्मृति पब्लिक स्कूल, प्रोफेशनल चिल्ड्रन हाईस्कूल एवं रघुकुल शिक्षा मंडल हाईस्कूल के स्कूल संचालकों ने लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त से मुलाकात की थी। अशासकीय विद्यालय संघ के अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि चारों स्कूल के 213 छात्रों की अंकसूची मंडल के पास जमा है। मंडल ने अब तक उनके बदले रेगुलर अंकसूची नहीं दी हैं। इस कारण छात्र अगली कक्षा में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।


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