900 गांवों में सूखे हैडपंप मेंटनेंस की कमी से भोपाल में जलसंकट

सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
गर्मी दस्तक के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में फिर जलसंकट की स्थिति बनने लगी है।
कई पंचायतें ऐसी हैं, जहां बोर ने पानी उगलना बंद कर दिया है या सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में प्रशासन गर्मी में होने वाले जलसंकट से निपटने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है। राजधानी के आसपास गांवों में पीने का पानी जनता को नसीब नहीं हो पा रहा है। बैरसिया और फंदा ब्लाक में 4245 हेंडपंप लगे हैं, जिसमें अभी 950 बंद पड़े हुए हैं, इनकों चालू करने के लिए पीएचई विभाग के जिम्मेदार अफसर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद कुछ क्षेत्रों में अमला पहुंचा किंतु हैंडपंपों का सुधार नहीं हो सका। नादंनी पंचायत के नरेला गांव ऐसा क्षेत्र है जहां वर्तमान में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है। यहां दो साल पहले खोदे गए ट्यूबवेल में अब तक मोटर नहीं डाली गई है। पंचायत के सरपंच राजेन्द्र वर्मा ने बताया कि इंजीनियरों की मनमानी से जनता को पानी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक मोटर से तीन इलाकों में पानी की आपूर्ति की जानी है, लेकिन जनता को अभी पानी नहीं मिल रहा है गर्मी में स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
राजधानी के अमझरा, परवलिया, बालमपुर, कान्हासैया सहित बैरसिया ब्लाक के अनेक गांवों में बंद पड़े हैंडपंपों को सुधारने के लिए अभी तक ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे है। इधर रीना विश्वकर्मा, जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि उनके क्षेत्र में आने वाले गांवों में करीब 100 हेंडपंप लगे हैं, लेकिन चालू 50 ही हैं। इसमें भी कुछ ऐसे हेंडपंप हैं, जिनका पानी पीने योग्य नहीं है। गर्मी के मौसम में जनता पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या के समाधान के लिए पीएचई विभाग के अफसरों को निर्देश दिए गए है। हैंडपंपों को सुधारने का कार्य चल रहा है। कुछ इलाकों में जलसंकट की शिकायतें आई है जिन्हें शीघ्र ही दूर किया जाएगा।
> मनमोहन नागर, अध्यक्ष जिला पंचायत भोपाल


facebook - जनसम्पर्क
facebook - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
twitter - जनसम्पर्क
twitter - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
जिला प्रशासन इंदौर और शासन की दैनंदिन गतिविधियों और अपडेट के लिए फ़ॉलो करें